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अजय देवगन के पिता वीरू देवगन को क्यों हुई थी जेल?
May 28, 2019 • रजत राज गुप्ता

मुंबई। सुपरस्टार अजय देवगन के पिता वीरू देवगन का सांस की बीमारी के चलते आकस्मक निधन हो गया। बॉलीवुड में उनके निधन की खबर आते ही मायूसी छा गई , जानकारी देते चलें की वीरू देवगन एक जाने माने स्टंट डायरेक्टर थे जिन्होंने अपने स्टंट्स से कई फिल्मे हिट करवाई है।
उनके बेटे अजय देवगन की पहली फिल्म फूल और कांटे में अजय देवगन का फेमस स्टंट जिसमे उन्होंने अपने दोनों पैरो को खोल कर दो अलग बाइक्स पर स्टंट किया था जिसे वीरू देवगन ने ही डायरेक्ट किया था जिसकी वजह से उनकी वो फिल्म बहुत ज्यादा हिट हुई थी। आईये जानते है वीरू देवगन से लेजेंड्री वीरू देवगन बनने उनका ख़ास सफर।


वीरू देवगन सं 1957 में 14 साल की उम्र में अपने दोस्तों के साथ अपने शहर अमृतसर को छोड़ कर मुंबई के लिए निकल पड़े और अपने दोस्तों के साथ फ्रंटियर मेल में बैठ कर मुंबई के लिए रवाना हो गए। इनके और इनके दोस्तों के दिमाग में इतना भी ख्याल नहीं आया कि उन्होंने टिकट भी नही ली और पूरे रास्ते भर टी-टी से बचते बचाते रहे। और मुंबई के करीब पहुँचते ही विरार रेलवे स्टेशन पे उन्हें टी-टी ने पकड़ लिए और मेजिस्ट्रेट के सामने पेश किया। मेजिस्ट्रेट ने कहा या तो फाइन दो या फिर जेल जाओ तो इनके और इनके दोस्तों के पास फाइन क लिए पैसे नई थे सो उन्हें 1 हफ्ते की सजा मिली। सजा पूरी करने के बाद इनके दोस्त खुश थे पर वीरू देवगन के दिमाग में एक ही ख्याल चल रहा था की स्टेशन में दो वक्त की रोटी तो मिलती थी और अब बाहर आ कर वो रोटी भी नही मिलेगी तो जेलर ने उन्हें बताया की मुंबई के साइन इलाके में क्यों नहीं जाते वह साइन कोलीवाला में बहुत से पंजाबी लोग रहते है क्या पता तुम्हारी कोई मदद हो जाये पर वीरू देवगन की किसी ने मदद नहीं की और उनके दोस्त भी परेशान होकर वापिस पंजाब चले गए। लेकिन इतना सब होने के बाद भी इन्होने हार नहीं मानी। इनके अंदर जो एक्टर बनने का जूनून था वो इतनी मुसीबतो के बाद भी खत्म नहीं हुआ।

उन्होंने कारें साफ़ करने का काम किया और कारपेंटर का भी काम किया । जब इनके पास थोड़े पैसे इकठ्टा हो गए तो इन्होने फिल्म इंडस्ट्री के चक्कर लगाने शुरू कर दिए पर कुछ दिनों बाद इन्हे पता चल गया की इनका चेहरा एक्टर बनने के लिए लायक नहीं है। जब वीरू देवगन को ये बात पता चली कि वे हीरो बन ही नहीं पीएंगे तो इन्होने उसी वक्त यह ठान लिया की यह एक्टर नहीं बन पाए तो क्या हुआ लेकिन यह अपने बेटे अजय को एक्टर जरूर बनाएंगे। यह सुन कर की वो हीरो नहीं बन पाएंगे वे कुछ समय तक परेशान ज़रूर रहे पर कुछ समय बाद उन्होंने कारपेंटरी के साथ साथ फ्री स्टाइल रेसलिंग भी सीखना शुरू कर दिया। फिर 1967 में इन्हे फिल्म ' अनीता ' जो की मनोज कुमार स्टार्रर फिल्म थी उसमे इन्हे बतौर स्टन्टमैन काम करने का मौका मिला। उस टाइम वीरू देवगन एक्शन फाइटर एक्टर रवि खन्ना के साथ जुड़ गए और बतौर स्टन्टमैन यह काम भी करते रहे। 1974 में इन्हे पहली बार फिल्म रोटी कपडा और मकान में स्टंट डायरेक्टर का काम मिला, मनोज कुमार शाह जो की इस फिल्म के प्रोडूसर थे उन्होंने वीरू को पहला ब्रेक दिया ।

इन्होने अपनी फ़िल्मी करियर में लगभग सभी बड़े एक्टर और डायरेक्टर के साथ काम किया है और इनके शरीर में ऐसे कोई भी हड्डी नहीं है जो टूटी ना हो।
वीरू देवगन ने अपने फ़िल्मी सफर में करीब 80 बेहतरीन फिल्मे काम किया । ''दिलवाले'',''फूल और कांटे'',''शहेंशाह'',"राम तेरे गंगा मैली","त्रिदेव","मिस्टर इंडिया" जैसे कई हिट फिल्मो में वीरू बतौर एक्शन डायरेक्टर काम कर चुकें हैं है। वीरू देवगन सिर्फ एक्शन डायरेक्टर ही नहीं थे वे-राइटर प्रोडूसर और एक्टर भी रहे चुके है। उन्होंने क्रांति (1981),सौरभ (1979),सिंघासन (1986) जैसी हिट फिल्मो में बतौर एक्टर भूमिका निभाई। वहीँ फिल्म हिंदुस्तान की कसम,दिल क्या करे,सिंघासन जैसे फिल्मो का निर्देशन भी किया है, और साथ ही साथ "मेरे पती सिर्फ मेरा है" और "विश्वात्मा" जैसे फिल्मो में एज आ असिस्टेंट डायरेक्टर काम किया।
वीरू देवगन 27 मई यानी कल सुबह मुंबई में उनका 77 साल की उम्र में निधन हो गया। बताया जा रहा है की उन्हें सांस लेने में समस्या हो रही थी जिसकी वजह से मुंबई के सांता क्रूज़ सूर्य हॉस्पिटल में उन्हें भर्ती करवाया गया । उनकी सांस की समस्या की वजहें से उनका कल सुबह दिल की धड़कन के रुकने की वजह से निधन हो गया। जिसके बाद पुरे बॉलीवुड जगत में शोक कि लहार फैल गई ।