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आदित्यनाथ को चढ़ गया बुखार
June 21, 2019 • Rajat

 

नई दिल्ली। योगी आदित्यनाथ को भी ममता का बुखार चढ़ा। जैसा की आप सब जानते है की प्रेस का काम सच को सामने लाना तथा उसकी तेह तक पहुंचना होता है। लेकिन आज कल प्रेस और मीडिया के इस काम में सरकार अर्चन दाल रही है। शुक्रवार को लखनऊ के हजरतगंज थाने में एक स्वतंत्र रिपोर्टर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई थी जिसमे उनके ऊपर योगी की छवि तथा उनके ऊपर गलत इल्जाम लगाने का आरोप लगया था। और इसी वजह से इस रिपोर्टर को उसके घर से उठा लिया था।

 

शुक्रवार को जिस रिपोर्टर को गिरफ्तार करा था उसका नाम प्रशांत कनौजिया है और वो स्वतंत्र पत्रकार है। उन्होंने पिछले हफ्ते अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर सी.ऍम योगी के ऊपर कुछ ऐसी बातें लिखी जिसकी वजह से उनके ऊपर केस दर्ज हो गया और शनिवार को उन्हें नॉएडा से गिरफ्तार कर लिया गया। आपको बता दे की जब पुलिस कर्मी उन्हें पकड़ने आये थे तब ना तो उनके पास अरेस्ट वारेंट था और ना ही अरेस्ट मेमो और उनकी पत्नी ने यह भी बताया की उनको पकड़ने आये लोग भी वर्दी में नहीं थे।

 

प्रशांत कनौजिया की पत्नी जगीशा ने बताया कि, 'सबकुछ 5 मिनट के अंदर हुआ। जिसकी वजह से मुझे कुछ समझ में नहीं आया। प्रशांत सीढ़ियों से नीचे गए और वापस लौटे तो कहा कि उन्हें कपड़े चेंज करके जाना होगा। दो लोग लेने आए हैं'। उन्होंने यह भी बताया की एसएचओ ने शनिवार की रात मेरी प्रशांत से बात करवाई थी और बताया था कि वे ठीक हैं और उन्होने मुझे भी अपना ख्याल रखने को कहा था। जगीशा ने बताया कि प्रशांत की गिरफ्तारी का पता लगने के बाद प्रशांत के माता-पिता काफी परेशान हो गए थे, लेकिन जागीशा ने उनका ढांढस बांधा और कहा कि जल्द ही सबकुछ ठीक हो जाएगा और आखिर कार ऐसा ही हुआ।

 

सुप्रीम कोर्ट ने कल प्रशांत को बाइज्जत बरी कर दिया है पर उनके ऊपर अभी भी केस चलेगा, और कोर्ट ने पुलिस अफसरो को फटकार लगाते हुए कहा की उन्होंने प्रशांत के ऊपर किस धारा के तहत गिरफ्तार करा है और अगर गिरफ़्तार किया तो उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश क्यों नहीं किया गया। कोर्ट ने उनसे प्रशांत को गिरफ्तार करते समय जो अरेस्ट मेमो बनाया जाता है उससे भी माँगा तो उनके पास वो भी नहीं मिला।

इसी बात पे राहुल गाँधी ने ट्वीट करते हुए कहा है की- "अगर ऐसी ही झूटी खबरे और मनगढ़ंत रिपोर्ट लिखने वाले या आरएसएस/बीजेपी प्रायोजित प्रोपैगेंडा चलाने वाले पत्रकारों को जेल में डाल दिया जाए तो अधिकतर अखबार और न्यूज चैनलों को स्टाफ की गंभीर कमी का सामना करना पड़ सकता है. यूपी के सीएम का व्यवहार मूर्खतापूर्वक हैं और गिरफ्तार पत्रकारों को रिहा करने की जरूरत है.

भले ही कोर्ट इससे पुलिस की मूर्खता कहे लेकिन हम सब जानते है की पुलिस वालों को ऐसा इसलिए करना पडा क्यों की यह केस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का था जिसकी वजह से उन्हें इतनी मुर्खता से प्रशांत को पकड़ना पडा।