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इसलिए 1.76 लाख करोड़ रुपये की जानकारी नहीं देना चाहती सरकार 
August 27, 2019 • Gulshan Verma


केंद्र सरकार बड़ी ही चालाकी से देश की लगातार सुस्त हो रही अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए एक ऐसा कदम उठाने जा रही है जो देश के लिए आने वाले समय में ना सिर्फ खतरनाक साबित हो सकता है बल्कि इस फैसले के चलते देश एक इतने बड़े संकट में फंस सकता है जिससे निकलने में शायद दशकों लग जायेंगे।
जानकारी के लिए बता दें कि रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने सोमवार को एक लाख 76 हज़ार करोड़ यानि पौने दो लाख करोड़ रूपये से ज़्यादा धन राशि मोदी सरकार को ट्रांसफर करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। ध्यान देने वाली बात ये है कि आरबीआई के 84 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब किसी सरकार ने 1.76 लाख करोड़ के सरप्लस फंड को खर्च करने का मन बनाया है और वो भी इस शर्त पर कि इस धनराशि को कहाँ खर्च किया जायेगा इसकी जानकारी सरकार किसी को नहीं देगी। 
वहीं इस ऐलान के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से एक बयान जारी किया गया है जिसमें कहा गया है कि सरकार इस रकम के इस्तेमाल होने के बारे में कोई जानकारी नहीं दे सकती, सरकार इसके बारे में निर्णय लेने के बाद सूचना जारी करेगी।
अब ये बात तो कहीं न कहीं इसी ओर इशारा कर रही है कि जब सरकार इस धन राशि को ठिकाने लगा देगी तब ही ये बताया जाएगा कि आखिर इतनी बड़ी रकम कहाँ खर्च की गई है।  वहीं विपक्ष लगातार सरकार के इस कदम पर सवाल उठा रहा है लेकिन सरकार जवाब देने की बजाय विपक्ष से ही सवाल पूछ रही है दरअसल जब कांग्रेस पार्टी ने इस फैसले को चोरी करार दिया और सवाल किया तो केंद्र सरकार ने ये बोल कर चुप करवा दिया कि चोरी तो आपके वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने की है और सवाल उनसे पूछना चाहिए। ऐसा नहीं है कि सिर्फ कांग्रेस ही इस फैसले को ग़लत बता रही है 
पूर्व डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने सरकार के इस कदम का कडा विरोध करते हुए इस फैसले को बदलने की मांग की थी। उन्होंने अर्जेंटीना का उदाहरण देकर सरकार को चेताया था कि हमें याद रखना चाहिए कि  6.6 बिलियन डॉलर सरकार को देने के दबाव में अर्जेंटीना सेंट्रल बैंक के गर्वनर मार्टिन रेडरेडो ने भी इस्तीफा दे दिया था। हालाँकि बाद में अर्जेंटीना की सरकार को फंड तो मिल गया था लेकिन उसके कुछ महीने बाद ही अर्जेंटीना के बॉन्ड, करेंसी और स्टॉक मार्किट धराशायी हो गए थे और अर्जेंटीना को इतना बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचा था जिससे अर्जेंटीना अभी तक उभर नहीं पाया है।