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कैसे हुआ दुनिया में सबसे पहले किनार का जन्म
June 21, 2019 • अपूर्वा गोस्वामी

जैसा की सबको पता है कि पुरुष और स्त्री एक समाज में रहते है उसी तरह दुनिया  में एक किनारो का भी अलग समाज है। आज से नहीं सदियों से किन्नरों के जन्म की परंपरा चलती आई है। लेकिन आज तक यह पता नहीं लगाया जा सका है कि आखिरकार किन्नरों का जन्म क्यों होता है वैसे ये तो सभी जानते हैं किन्नर या हिजड़ा माता पिता नहीं बन सकते हैं लेकिन सवाल यह उठता है कि किन्नर कैसे पैदा हो जाते हैं?

मनुष्य में जैसे २ प्रकार की जाति है वैसे ही किनारो में भी दो प्रकार कि जाति है। एक किन्न पुरुष और दूसरी किन्नरी। इसे किन्न पुरुष ही कहा जाता है। मनुष्य जाति में हम सब जानते हैं कि स्त्री और पुरुष होते हैं। उनके जन्म की बात को भी हम जानते हैं कि कैसे होती है। लकिन आज हम इस रिपोर्ट में बताएँगे की पुराणिक कथाओ के अनुसार किनारो का जन्म कैसे हुआ?

बहुत पहले प्रजापति की समय एक इल नाम का पुत्र था। सुनने में आया कि इल को शिकार करने का हद से ज्यादा शोक था। अपना शोक पूरा करने के लिए वह अपने सैनिको के साथ एक जंगल में जाकर शिकार किया करते थे। वह सब एक दिन शिकार करते करते उस पर्वत पर  पहुँच गए जहाँ शिव और पार्वती  विहाग कर रहे थे। ऐसा माना जाता है कि भगवन शिव जी पार्वती माता को खुश करने के लिए स्त्री बन गए थे। और साथ ही आपको बता दे कि शिव जिस समय स्त्री बन रहे थे उस समय जंगल के सारे जीव जंतू, पेड़ पौधे सब स्त्री बन गए। चुकी राजा इल भी उसी जंगल में मौजूद थे, सो राजा इल भी स्त्री बन गए और उनके साथ आये सारे सैनिक भी स्त्री बन गए।

इल अपने आपको स्त्री रूप में देख कर बहुत चिंतित हुए। अब वह ये सोच रहे थे की वह क्या करे वापस से पुरुष बनाने के लिए। इस डर की वजह से राजा इल शिव जी की पास पहुँच गए और जा कर अपने आप को पुरुष में परिवर्तित करने की गुज़ारिश करने लगे। लकिन इस बात पर शिव ने बोला कि इस वरदान को छोड़ कर कोई भी वरदान मांग लो में दे दूंगा। इल ने दूसरा कोई भी वरदान मांगे से मन कर दिया और वहाँ से जाने लगे। फिर वह जाकर अपनी साडी कहानी माता पार्वती को बताने लगे लेकिन माता पार्वती ने राजा से कहा कि तुम जिस पुरुषत्व का वरदान चाहते हो उसके आधे हिस्से के दाता तो खुद महादेव हैं। मै सिर्फ तुम्हे आधा हिस्सा दे सकती हूँ। मतलब कि तुम अपना जीवन स्त्री में और आधा पुरुष में बिता सकते हो।  अतः तुम कब स्त्री रूप में और कब पुरुष रूप में रहना चाहते हो यह सोच कर मुझे बता दो। इस पर राजा इल ने सोच-समझ कर माता पार्वती से कहा कि हे मां मैं एक महीने स्त्री के रूप में, और एक महीने पुरुष के रुप में रहना चाहता हूं

पार्वती माँ ने इल को यह भी बताया कि जिस समय तुम जिस रूप में रहोगे उस समय तुम्हे दूसरे रूप का कुछ याद नहीं रहेगा। और सब कुछ मान कर इल ने पार्वती जी से यह वरदान ले लिया। परंतु राजा के सारे सैनिक स्त्री रूप में ही रह गए।

यह भी कहा जाता है कि वो सारे सैनिक एक दिन स्त्री इला के साथ वन में घूमते घूमते चंद्रमा के पुत्र महात्मा बुद्ध के आश्रम में पहुंच गए थे। तब चंद्रमा के पुत्र महात्मा बुद्ध ने इन स्त्री रूपी सैनिकों से कहा कि तुम सब किन्न पुरुषी इसी पर्वत पर अपना निवास स्थान बना लो। आगे चलकर तुम सब किन्न पुरुष पतियों को प्राप्त करोगे।

 

इस तरह से हुई किन्नरों की उत्पत्ति किन्नरों के बारे में सारी जानकारी विस्तृत रुप से वाल्मीकि रामायण के उत्तरकांड में स्पष्ट रुप से लिखा हुआ है।