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गिरीश कर्नाड की आज सुबह मल्टीप्ल ऑर्गन्स फेल होने की वजह से मृत्यु हो गयी
June 10, 2019 • रजत राज गुप्ता

 

अभी कुछ दिन पहले ही अजय देवगन के पिता और फिल्म जगत के मशहूर स्टंट डायरेक्टर वीरू देवगन इस दुनिया को छोड़कर हमेशा हमेशा के लिए चले गए थे पर इस गम से जब तक फिल्म जगत के कलाकार निकलते उससे पहले ही एक और मशहूर एक्टर,साहित्यकार,और नाट्यकार को लेकर एक बुरी खबर सामने आई है।मशुर साहित्यकार गिरीश कर्नाड की आज सुबह मल्टीप्ल ऑर्गन्स फेल होने की वजह से मृत्यु हो गयी। गिरीश कर्नाड काफी दिनों से बीमार चल रहे थे। गिरीश कर्नाड को आपने सलमान की हिट फ़िल्में एक था टाइगर और टाइगर जिन्दा है में रॉ के चीफ के रोल में देखा था।

गिरीश कर्नाड का पूरा नाम गिरीश रघुनाथ कर्नाड था। उनका जनम 19 मई 1938 को माथेरन (महाराष्ट्र) में हुआ था।उनकी मां कृष्णाबाई मानकीकार थी जो बहुत ही कम उम्र में विधवा हो गयी थी।उसके बाद वो एक अस्पताल में काम करती थी जहा उनकी  मुलाकात डॉ रघुनाथ कर्नाड से हुआ, लगभग 5 साल तक उनकी माँ की और डॉ रघुनाथ की शादी नहीं हुई थी क्यों की उस टाइम विधवा से शादी करने की कोई प्रथा नहीं थी। पर आखिर में आर्य समाज के बटवारे के बाद दोनों की शादी को मान्य कर दिया और दोनों शादी कर महारष्ट्र छोड़ दिया और कर्नाटक आ गए।गिरीश कर्नाड 4 भाई बहनो में 3 से थे।उन्होंने अपनी पढाई कर्णाटक में पूरी की और उसके बाद कर्नाटक के कॉलेज धारवाड़ (कर्नाटक यूनिवर्सिटी) से बैचलर ऑफ़ आर्ट्स डिग्री हासिल की जो की गणित और स्टैटिक्स में थी।उनकी ग्रेजुएशन पूरी होने के बाद उन्होंने इंग्लैंड की ओक्सफोरड यूनिवर्सिटी में फिलॉसफी , पॉलिटिक्स और इकोनॉमिक्स एज आ रोडर्स स्कॉलर पढ़ाई कर मास्टर्स की डिग्री हासिल की।  उसके बाद 1963 में कर्नाड को ऑक्सफ़ोर्ड यूनियन का प्रेजिडेंट भी बनने के लिए चुना गया था। ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस (चेन्नई) में काम करने के बाद उन्होंने उससे छोड़ दिया जिसके बाद वोह मद्रास (चेन्नई) में कुछ छोटे नाटक मण्डली से जुड़ गए जिसका नाम दा मद्रास प्लेयर था। इसके बाद कर्नाड ने शिकागो की यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर बन गए जिसमे इन्होने एक कन्नड़ नाटक को इंग्लिश में ट्रांसलेट किया था जिसको शिकागो के गठरी थिएटर मिनेपोलिस में दिखाया गया था। उसके बाद इनकी दिलचस्पी नाटकों में आ गयी।

1960 के समय में कर्नाड के नाटकों के लेखन की वजह से उन्हें लोग पहचानने लगे। गिरीश कर्नाड की कन्नड़ साहित्य में ऐसी है जैसी भूमिका बंगाली में बादल सरकार, मराठी में विजय तेंदुलकर और हिंदी में मोहन राकेश जैसे दिग्गज नाटककारों की है। लगभग पांच दशक से भी ज्यादा समय तक कर्नाड नाटकों की कहानिओं में  सक्रिय रहे और साथ ही साथ कर्नाड ने अंग्रेजी के भी कई नाटकों का अनुवाद किया हुआ है। कर्नाड के भी नाटक कई भारतीय भाषाओं में अनुवादित हुए हैं। कर्नाड ने हिंदी और कन्नड़ सिनेमा में अभिनेता, निर्देशक और स्क्रीन राइटर के रूप में काम किया है। उन्हें पद्मश्री और पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया है और उन्हें चार फिल्म फेयर अवॉर्ड भी मिले हैं।

 

ग‍िरीश कर्नाड की 1978 में आई फिल्म "भूमिका" के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला था जिसमे उन्होंने उसकी कहानी लिखी थी।1998 में साह‍ित्य के प्रत‍िष्ठ‍ित अवार्ड ज्ञानपीठ से सम्मानित किया गया था। ग‍िरीश कर्नाड ऐसे अभ‍िनेता हैं ज‍िन्होंने कमर्शियल स‍िनेमा के साथ समानांतर स‍िनेमा के ल‍िए भी सराहे गए।

 

उनकी आखरी फिल्म टाइगर जिन्दा है थी जो की सलमान खान के साथ की थी और वो फिल्म हिट भी रही थी। उस फिल्म में गिरीश को एक टीयुब लगाए हुए देखा होगा क्यों की उनकी हालत फिल्म में अच्छी नहीं दिखाएगी गयी थी लेकिन ऐसा नहीं है उनकी हालत असलियत में सही नहीं थी। उनकी तबियत पीछे 3 से 4 सालों से सही नहीं थी और उन्हें कई बार अस्पताल में भर्ती भी करवाया गया था लेकिन आ सुबह उनके मृत्यु हो गयी।