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जब किन्नर पैदा होता है तो उसके साथ क्या करते हैं?
September 20, 2018 • Gulshan Verma

किन्नर समाज यानी एक ऐसा समाज जो स्त्री परुष ना होकर भी समाज की सबसे बड़ी ज़रूरत है , लेकिन किन्नरों की क्या ज़रूरत है? इस बात से दुर्भाग्य वश हमारे समाज को कोई लेना देना नहीं है। आपने अक्सर देखा होगा इन किन्नरों को अपने आस-पास शादियों वाले घर में, या फिर किसी ऐसे घर में नाचते हुए ज़रूर देखा होगा जहाँ किसी बच्चे का जन्म हुआ हो ,लेकिन सोचिये कितना मुश्किल होता होगा इन लोगों के लिए किसी के बच्चा होने पर नाचना , और वो भी ऐसी अवस्था में जब इनहे पता है की ये कभी माता-पिता नहीं बन सकते, इन्हे कभी औलाद का सुख नहीं मिल सकता। ये ही नहीं लोग इन्हे हिजड़ा, छक्का और ना जाने कैसे कैसे नामों से पुकारते हैं। हमारे समाज में विकलांग व्यक्ति को तो फिर भी रोजगार मिल जाता है लेकिन इन्हे कोई अपने पास काम पर भी नहीं रखता , हाँ रात में किसी सुनसान सड़क पर इनके साथ , मस्ती करने में हमारे समाज को कोई परहेज़ नहीं है। और मान लीजिये एक प्रतिशत किसी के घर में किन्नर का जन्म हो भी जाये तो क्या वो उसे अपनी इच्छा से अपने पास रख सकता है? जवाब है नहीं ! बिलकुल नहीं , किन्नरों का ग्रुप आता है और उस बच्चे को अपने साथ ले जाता है , और ये ही नहीं जब किसी किन्नर की मृत्यु होती है तो उससे चपलों से मरते हुए ले कर जाते हैं ताकि उसका दोबारा जन्म न हो , लेकिन सवाल ये है आखिर कौन ज़िम्मेदार है किन्नरों की इस दशा का ? किसने बनाये ये नियम , क्यों नहीं रह सकते किन्नर आम नागरिकों की तरह ? क्या वो बच्चा गोद ले कर उसे पाल नहीं सकते ? किन्नर भी चाहें तो अपनी ज़िंदगी जी सकते हैं लेकिन ये समाज उन्हें नहीं जीने देता क्यों नहीं देता शायद खुद भी इस बात को नहीं जनता।