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निधिवन में हर रोज़ होते हैं ऐसे अजीबो-गरीब चमत्कार देख कर दांग रह जायेंगे  
July 1, 2019 • अपूर्वा गोस्वामी

 

          

कृष्णा जी की रासलीला से लेकर गोपियों तक की भक्ति तक का गवाह बना है शहर वृन्दावन यह वृन्दावन आज भी कृष्ण जी की भक्ति के लिए माना जाता हैं। वृन्दावन की हर गली हर मोहल्ले में यह नटखट गोपाल और उनकी रासलीला बस्ती हैं। नटखट गोपाल ने सबका मन जीत रखा हैं। अब बात करते हैं वृन्दावन में एक ऐसी जगह की जहाँ आज भी कृष्णा गोपियो के साथ नृत्य करते हैं। जी हाँ  अपने बिलकुल ठीक सुना हैं आज भी वृन्दावन में एक ऐसी जगह पायी जाती हैं जहाँ कृष्णा गोपियों के साथ रास-रचते हैं।

 

आपको बता दे की इस जगह का नाम हैं निधिवन, निधिवन ही वह जगह हैं जहाँ कृष्ण गोपियों के साथ रास-रचते हैं। निधिवन के अंदर ही हैं चित्रवट जहाँ कृष्णा जी गोपियों के साथ आते हैं। “रंग महल” राधा रानी का श्रृंगार घर हैं। शाम को 7 भेजे से पहले यहाँ पर जो पलंग रखा है उसको ठीक करके यह बंद होता है लेकिन हैरान कर देने वाली बात तो यह है की सुबह यहाँ पलंग की चादर ख़राब मिलती है| यहाँ पर रात के समय लड्डू, दातुन, लोटे में जल, 16 श्रृंगार रख कर जाते हैं और सुबह आ कर देखा जाता  हैं तो लड्डू फूटा हुआ मिलता हैं, पान चबा हुआ मिलता हैं, दातुन किया हुआ मिलता हैं, लोटे का जल फिला हुआ मिलता हैं और 16 श्रृंगार बिखरा हुआ मिलता हैं। यहाँ पर सुबह 5 भेजे मंगला आरती होती हैं। ऐसी मान्यता हैं की "जो करे मंगला और कभी न हुए कंगला, मंगला मुखी तो सदा सुखी"। चित्रवत पहले सारा गोबर और मिटटी का बना हुआ था धीरे-धीरे जैसे-जैसे भक्त लोगो की मनोकामना पूरी होती गई तो अंदर से इसको पूरा कांच का बनवा दिया और इसकी मरमत करवा दी गई। साथ ही आपको यह भी बता दे की यहाँ से जो प्रशाद मिलता हैं वह सिंदूर का होता हैं जो माताएं, बहने सुहागन होती हैं वह यह प्रशाद ली जाती हैं और लगाती हैं।

ऐसा कहा जाता हैं की निधिवन का महत्व बताना बहुत ज्यादा कठिन हैं। क्योकि यह भूमि रस भूमि हैं और जो इंसान इस भूमि में डूब जाता हैं वह पागल सा हो जाता हैं। यह निधिवन वह स्थान हैं जहाँ पर नटखट कन्हैया ने राधा रानी के साथ महारास रचाया था। सारे रासो को मिलाकर महारास बनता हैं। यहाँ पर श्याम सूंदर ने राधा रानी का श्रृंगार किया था।

अब बात करते हैं की निधिवन को संधिया होते ही क्यों बंद कर दिया जाता हैं?

संधिया होते ही निधिवन को बंद कर दिया जाता हैं। इंसान तो दूर की बात निधिवन को बंद करने के बाद यहाँ पर कोई पशु-पक्षी भी नज़र नहीं आता हैं। वैसे तो निधिवन बंद होते ही यहाँ पर कोई भटकता तक नहीं हैं। और यदि कोई छूप कर कृष्ण और राधा की रासलीला देखने की कोशिश भी करता हैं तो वह पागल हो जाता हैं। उदहारण दे तो आज से 10 वर्ष पहले जब एक जयपुर से आया भक्त छूप कर रासलीला देख रहा था तो हैरान कर देने जैसा देखा की वह बेहोश और बिलकुल अपना मानसिक संतुलन खो बैठा था। ऐसे बहुत से किस्से सुनाई पड़ते हैं। ऐसे ही एक "पागल बाबा" थे जिनकी समाधी निधिवन में बनी हुई हैं। ऐसा कहा जाता हैं कि उन्होंने भी निधिवन में एक बार छूप कर रासलीला देखने की कोशिश की थी। और वह भी पागल हो गए थे। वह दिन रात कृष्ण राधा कि पूजा किया करते थे इसलिए उनके मृत्यु के बाद उनकी समाधी निधिवन में बनवा दी गई।

अब बात करते है कि यहाँ अंदर जो भी रुकता है उसके साथ ऐसा क्यों होता है?

जो भी इंसान रासलीला देखने के लिए अंदर रुकता हैं वह या तो पागल, अन्धा, या उसकी मृत्यु ही हो जाती हैं। सोचने वाली बात हैं ऐसा क्यों होता हैं आइये हम आपको बताते हैं ऐसा इसलिए होता हैं क्योकि कोई भी अगर उनकी मर्ज़ी के बिना यह सब देखता हैं तो वह कैसे उस रूप-सौंदर्य से बच सकता हैं। जब हम किताबो में उनके रास के बारे में पड़ते हैं तब हम पागल से हो जाते हैं तो असलियत में देख लिया तो ये सब होना सोभाविक हैं।

अब हम आपको बताते हैं यहाँ के पेड़ो के बारे में

यहाँ के पेड़ ऊपर की ओर नहीं बल्कि नीचे की ओर बढ़ते हैं रस्ते बनाने के लिए भी डंडे लागए हुए हैं। और यहाँ पर जो तुलसी के पौधे हैं वह जोड़े में हैं। ऐसी मान्यता हैं की जब कृष्णा और राधा रास रचते हैं तो यह तुलसी के पौधे गोपिया बन जाते हैं। एक मान्यता यह भी हैं की इन तुलसी के पोधो की कोई एक पत्ती तक नहीं ले जा सकता हैं। हैरान कर देने वाली बात तो यह हैं की इन तुलसी के पोधो की ऊंचाई एक समान ही रहती हैं आज तक इतने वर्षो से यह तुलसी के पौधे इतने ही हैं।

यह सब बाते सुन कर आपके अंदर भी रासलीला देखने की उत्सुकता हो रही होगी लेकिन यह भूल कर भी न करे क्योंकि जिसने भी ऐसा किया है वह ज़िन्दा बहार नहीं आया हैं|