ALL Special Stories Delhi/NCR Current Affairs Political News Bollywood News T.V Serial Updates Breaking News Spiritual अजब गजब News Sidnaaz
पत्थरों को भाप बना कर इस मंदिर का हुआ था निर्माण
June 25, 2019 • अपूर्वा गोस्वामी

 

प्राचीन समय में कई ऐसी जगह ढूंढी गयी थी जो आज लुप्त हो गयी हैं| इस बात में किसी को कोई डाउट नहीं है कि उस समय की विज्ञान कितना अच्छा था| अपनी आज की इस रिपोर्ट में हम आपको एक ऐसे शिव मंदिर के बारे में बताएँगे जिसको देख कर वैज्ञानिक भी हक्का-बक्का हैं| क्योंकि आज के समय में इतनी टेक्नोलॉजी होने के बाद भी ऐसा मंदिर बनाना बहुत मुश्किल हैं|

यह मंदिर महारष्ट्र के औरंगाबाद में स्थित हैं| इसको कैलाश मंदिर के नाम से जाना जाता हैं| इस मंदिर ने वैज्ञानिको को सोचने पर मजबूर कर रखा है कि यह मंदिर बना कैसे? और आपको यह भी बता दे की इस मंदिर को लेकर साइंटिस्ट के अलग-अलग दावे हैं| कुछ वैज्ञानिको का मानना है कि यह मंदिर 1900 साल पुराना है और कुछ का मानना है कि यह मंदिर 6000 साल से भी पुराना हैं| इस मंदिर की ऊंचाई 100 फुट मापी गयी हैं|

हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि इस मंदिर को ईटों और पत्थरो से जोड़ कर नही बनाया गया बल्कि एक ही पत्थर से बनाया गया है, इसलिए बनाने वाले की कला को हम सलाम करते हैं| इस वजह से ही आज तक यह पता न चल पाया की यह मंदिर कितने साल पुराना हैं| इस कैलाश मंदिर में कोई भी ऐसी चीज का इस्तेमाल नहीं किया गया जिससे हम पता चल सके की यह कितने साल पुराना मंदिर हैं| और यह बात भी समझ आती हैं की यह मंदिर जिस पत्थर से बनाया उसकी कार्बन डेटिंग तो मंदिर से भी पुरानी होगी|

दरअसल ऐसा मानना हैं की इस मंदिर को बनाने में 18 साल की करीब का वक़्त लगा और विज्ञानिको का कहना हैं की आज के इस टेक्नोलॉजी की दौर में भी ऐसा मंदिर 18 साल में बनाना असंभव सा जान पड़ता हैं| और एक और हैरान कर देने वाली बात तो यह हैं की इस मंदिर को नीचे से ऊपर नहीं बल्कि ऊपर से नीचे की ओर तैयार किया गया हैं|

अगर इस मंदिर को खुदाई करके बनाया होगा तो इसमें से करीब 5 लाख टन पत्थर निकले होंगे| सोचने वाली बात तो यह हैं की अगर यह मंदिर 18 साल में पूरा करना होता तो कोई इंसान रोज 12 घंटे काम करता तो उसको रोज के 150 टन पत्थर हटाने होते जो बिलकुल असंभव हैं| एक बात हमने आपको पहले ही क्लियर कर दी थी की इतनी टेक्नोलॉजी होने के बाद भी हम इसको 18 साल में नहीं बना सकते क्योकि इसको खुदाई करके नहीं बल्कि हलके औजारो से बनाना पड़ेगा| विज्ञानिको का कहना हैं कि उस समय में इसको 200 साल से पहले बनाना असंभव हैं|

यह भी जानकारी आपको दे देते हैं कि हमारे वेदो में एक अस्त्र के बारे में बात कि गयी हैं जिसका नाम था वोम शास्त्र जिससे इसको बनाया जा सकता हैं| इस अस्त्र से पत्थर को भी आप भाप बना सकते हो| ऐसा माना जा सकता हैं कि इस अस्त्र से ही इस मंदिर का निर्माण किया गया होगा|

इस मंदिर कि गुफाएं भी मंदिर का एक रहस्य हैं  वर्ष 1876 को इंग्लैंड कि एक स्प्रिचैल अमा हैंड्रिक ने एक बुक लिखी जिसमे उन्होंने अपने अनुभव बताये और इस कैलाश मंदिर में बनी गुफाओं के बारे में भी बताया और एक ऐसे ब्रिटिश से मिले जो इन गुफाओ में नीचे तक जा चुके थे| उन्होंने यह बताया कि जब वह नीचे इन पतली-पतली गुफाओ में गए तो उन्हें नीचे एक खुला सा मंदिर मिला जिसमे उन्हें 7 लोग मिले जिसमे से उन्हें एक धुंधला सा दिख रहा था क्योकि वह कभी दिख रहा था और कभी गायब हो रहा था|

यह बुक  प्रिंट होने के बाद विज्ञानिको ने गुफाओ में जाकर रिसर्च की थी लकिन इन गुफाओ को सरकारी तौर पर बंद कर दिया गया| और आज तक यह गुफाएं बंद हैं| सोचने वाली बात तो यह हैं की इन गुफाओ में ऐसा क्या हैं जो इन गुफाओ की रिसर्च नहीं करने दी जाती| इस कैलाश मंदिर से हमे इस बात को मानने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए की उस समय का विज्ञान आज के समय से बहुत विकसित था| इस मंदिर की गुफा से शायद हमे कोई रहस्य्मय चीज मिल जाये क्योकि बड़े-बुजर्गो का और हमारे धर्म का कहना हैं कि शिव के सबूत तक  हम कहीं भी ढूंढ सकते हैं बस मन में शिव जी होने चाहिए|  

विडियो देखें 

https://www.youtube.com/watch?v=mzZbVS9QVdY