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फिर एक बार चमकी ने ली 25 मासूमों की जान
June 11, 2019 • रजत रात गुप्ता

नई दिल्ली। आज कल का मौसम ऐसा है जिसमे बीमारियों का सबसे ज्यादा आवागमन होता है। चाहे वो मलेरिया, चिकनगुनिया या फिर इन्फ्लाइटिस हो, बीमारियों का हर जगह प्रकोप है। ऐसे ही एक बिमारी इन दिनों सबसे ज्यादा चल रही है। इस बीमारी का नाम चमकी है। बिहार में इस बीमारी का सबसे ज्यादा प्रकोप है।

एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) और जापानी इंसेफलाइटिस (जेई) बिमारी उमस भरी गर्मी के समय आती है और पूरे बिहार को झिंझोर कर चली जाती है। इस बिमारी से हर साल लगभग 40 बच्चों की मौत होती है और इस साल भी 56 बच्चों की मौत हो गयी है। इस बिमारी में पहले बुखार आता है और फिर शरीर अकड़ने लग जाता है।डॉक्टर्स का कहना है की इस बिमारी के बाद बच्चों में शुगर और सोडियम (नमक) की कमी हो जाती है। इस बीमारी के इलाज से पहले डॉक्टर्स ब्लड शुगर, सोडियम, पोटैशियम की जाँच करते है और फिर इलाज चालू करते हैं।

चमकी बुखार के पीड़ितों को श्रीकृष्ण मेमोरियल कॉलेज हॉस्पिटल (एसकेएमसीएच) और केजरीवाल मातृ सदन में भर्ती किया जा रहा है। एसकेएमसीएच अध्यिक्ष डॉ .सुनील शाही ने सोमवार को बताया कि सोमवार को एसकेएमसीएच में बुखार से पीड़ित 20 बच्चे पहुंचे हैं, जिन्हें पीसीआईयू में भर्ती कराया गया है। उन्होंने कहा कि इस अस्पताल में अब तक 72 पीड़ित बच्चों को भर्ती कराया गया है, जिसमें से इलाज के दौरान 19 बच्चों की मौत हो चुकी है। और वही केजरीवाल अस्पताल की बात करें तो वहां के प्रबंधक ने बताया की उनके यहाँ इस हफ्ते के भीतर चमकी बुखार से पीड़ित 39 बच्चों को भर्ती कराया गया है,जिसमें से 4 बच्चों की मौत हो गई।

मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने इस खबर पे चिंता व्यक्त करते हुए कहा की,"लोगों को इस बीमारी को लेकर जागरूक कराना होगा। हर साल बच्चे काल के गाल में समा जा रहे हैं। यह चिंता का विषय है।" इस इस बीमारी के अधिकांश मामले मुजफरपुर और उसके आस पास के इलाकों से आ रहे है। स्वस्थ विभाग ने अभी तक 11 बच्चों की मौत की पुष्टि की है जिनकी हाइपोग्लाइसीमिया (शुगर की कमी) की वजह से उनकी मृत्यु हुई है।