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बंगाल में 700 डॉक्टरों ने एक साथ नौकरी छोड़ी हड़ताल जारी
June 15, 2019 • Gulshan Verma

कहते हैं भगवान् के बाद अगर कोई इस दुनिया में समाज की निस्वार्थ भलाई करना जनता है तो वो है एक डॉक्टर लेकिन जब एक डॉक्टर की हिफाज़त करने में ही सरकार ना काम हो जाए और उल्टा डॉक्टरों को चेतावनी देने लगे कोई मुख्यमंत्री तो ज़ाहिर सी बात है इस माहौल में कोई भी काम नहीं करना चाहेगा। पुरे देश के डॉक्टर्स में एक तरह का गुस्सा दिखाई दे रहा है और कहाँ न कहीं ये गुस्सा जायस भी है क्यूंकि अगर इंसान को बचाने वाले डॉक्टर को अपनी जान बचाने के लिए नौकरी छोड़नी पड़े तो ये चिंता का विषय है।
कोलकाता के एनआरएस हॉस्पिटल में डॉक्टरों के साथ मारपीट का मामला सामने आने के बाद देश भर के मरीज़ों के लिए एक नई समस्या खड़ी हो गई है। एक तरफ ममता बनर्जी अपनी दबंगाई दिखा रही है और बोल रही है की अगर 48 घंटों में डॉक्टर्स काम पर वापिस नहीं लौटे तो अंजाम अच्छा नहीं होगा वहीँ दूसरी तरफ डॉक्टरों का कहना है की जब तक ममता बनर्जी माफ़ी नहीं मांगती और डॉक्टर्स की सुरक्षा जो को उनका बेसिक अधिकार कर उन्हें नहीं मिलता तब तक हड़ताल जारी रहेगी। इस हड़ताल का बहुत बुरा असर पड़ रहा है न सिर्फ बंगाल राजय पर बल्कि पुरे देश पर कल यानी की शुक्रवार को राजधानी दिल्ली में तक़रीबन 50 हज़ार से ज़्यादा मरीज़ों को इलाज नहीं मिला और उन्हें वापिस लौटा दिया गया ।वहीँ डॉक्टर्स भी इस हड़ताल से खुश नहीं है और बात इतनी ज़्यादा बढ़ चुकी है की अब तक 700 डॉक्टर्स इस्तीफा दे चुकें हैं और इस्तीफे का ये दौर अभी भी लगातार जारी है ।

ममता बनर्जी अपनी ज़िद पर अदि हुईं है और लगतार डॉक्टर्स को चेतावनी दिए जा रही हैं और इसकी वजह से कई लोग इलाज न मिलने के कारण एपीआई जान से हाथ धो बैठे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो ऐसी 6 मांगे हैं जिन्हे लेकर पुरे देश के डॉक्टर्स विरोध और गुस्सा ज़ाहिर कर रहे हैं जिसमे से सबसे पहली शर्त है की ममता बनर्जी डॉक्टरों से लिखित में माफ़ी मांगे , दसूरी शर्त है जिन लोगों ने डॉक्टरों के साथ ग़लत व्यहवार किया है उनके खिलाफ कार्यवाही की जाए , चिकत्सा व्यवस्था में सुधर लाया जाए डॉक्टरों के खिलाफ जो झूठे मुकदमे बांये गए हैं उन्हें वापिस लिया जाए , सुरक्षाकर्मी जिन्होंने डॉक्टरों को पीटते हुए नहीं बचाया उनकी जाँच हो और डॉक्टर्स की सुरक्षा के लिए CRPF सुरक्षा की मांग शामिल है ।
हालफिल हालत काबू से बहार होते जा रहे है एक तरफ जनता की मज़बूरी है और दूसरी तरफ ममता बनर्जी को लगता है की उनका attitue ज़रूरी है।