बीजेपी पर फूटा मेनका गाँधी का गुस्सा 
August 4, 2019 • Gulshan Verma

लोकसभा चुनाव 2019 भारत के इतिहास का सबसे दिलचस्प चुनाव रहा , जिन बड़े नेताओं ने कुछ नहीं किया उन्हें मोदी सर्कार  ने भरपूर सम्मान से नवाज़ा और जिन्होंने चमचागिरी नहीं की उन्हें बहार का रास्ता भी दिखा दिया गया। और इसका सबसे बड़ा उद्धारण है पूर्व महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गाँधी। गौरतलब पहले उन्हें लगता था की वे दोबारा से महिला और बाल विकास मंत्रालय का नेतृत्व करेंगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ उनकी जगह ली स्मृति ईरानी ने , वहीँ प्रोटेम स्पीकर और लोकसभा अध्यक्ष की दौड़ से भी उन्हें बाइज़्ज़त बहार कर दिया गया। 
ज़ाहिर है इसके दो ही रीज़न हो सकते हैं एक ये की उनके नाम के आगे गाँधी लगता है या फिर उनका वो ब्यान भी एक मुख्य कारण हो सकता है जो उन्होंने मुस्लिम समुदाय को लेकर दिया था , हालाँकि इस ब्यान पर इतना ज़ोर श्याद नहीं दिया जा सकता क्यों लोकसभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश के बहुत से बीजेपी नेता मुस्लिम समुदाय के लिए अजीबोगरीब ब्यान दे चुकें हैं , न उनके खिलाफ कोई एक्शन हुआ न उनकी सीट गई। वहीँ मेनका गाँधी ने हाल ही में एक बड़ा फैसला लिया जिसे लेकर वो चर्चाओं में बनी हुई हैं , सूत्रों की माने तो मेनका गाँधी ने बुज़ुर्ग महिला की सहायता की है जो पिछले कई दिनों से धरना पर बैठी हुईं थी , 

किस्सा  दरअसल सुल्तान पुर के बल्दीराय का , उतर प्रदेश के बल्दीराय की रहने वाली इस बुज़ुर्ग महिला को कुछ दबगं लगतार परेशां कर रहे थे और इतना ही नहीं उन्होंने इसकी ज़मीन भी हड़प ली और ये बुज़ुर्ग महिला सड़क पर आ गए वहीँ सोचने वाली बात इस पुरे मामले में बीजेपी के अधिकारी लिप्त पाए गए ,महिला ने तंग आ कर डीएम ऑफिस के बहार आमरण अनशन शुरू कर दिया 28 मई 2019 से शुरू हुए इस अनशन को जब 2 महीने हो गए तो अचानक जब मेनका गाँधी की नज़र इस बुज़र्ग महिला पर मेनका गाँधी अधिकारीयों पर भड़का उठी और जल्द ही इस महिला की समस्या हल करने के लिया प्रतिनिधि रणजीत कुमार को भेजा और ये आदेश जारी किया की जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान होना चाहिए। बेशक मेनका गाँधी का ये कार्य सराहनीये है लेकिन कहीं न कहीं मेनका गाँधी इस वक़्त बीजेपी से नाराज़ नज़र आ रही जिस तरह से उन्हें मंत्री मंडल से बहार रखा गया ये बात उन्हें लगतार परेशान कर रही है।