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महात्मागॉधी की बात मानते तो हिन्दी होती राष्ट्रभाषा
September 16, 2018 • Vishnu Chansoliya
उरई जालौन। 14  सितम्बर को हिन्दी दिवस के रूप मे हर साल मनाया जाता है इस दिन हिन्दी के प्रचार प्रसार के लिए सरकारी तथा गैर सरकारी संस्थाओं मे विविध प्रकार के आयोजन होते है तथा 14 दिनों तक हिऩ्दी पखावारे के अवसर पर हिन्दी कविता भाषण निम्बन्ध आदि प्रतियोगताओं का आयोजन किया जाता है ! 
आज पूरे देश की शिक्षण संस्थाओं हिन्दी संस्थानों मे हिन्दी दिवस पूरे हर्षोल्लाश से मनाया जा रहा है हम सबको भी हिन्दी के बारे मे जानना चाहिए आखिर हिन्दुस्तान मे हिन्दी को राष्ट्रभाषा होने का दर्जा क्यों नहीं मिला ! 
भारत की आजादी के बाद बात सामने आई कि देश की राज्य भाषा किसे बनाया जाय तब १४ सितम्बर १९४९ को संविधान सभा ने एक मत होकर हिन्दी को राज्य भाषा का दर्जा दिया !  देश के प्रथम प्रधान मंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने हिन्दी को राष्ट्र भाषा के साथ ही अग्रेजी को भी वही सम्नान दिया !  तबसे 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस के रूप मनाया जाने लगा ! हिन्दी दिवस भारत मे नहीं अपितु विश्व के कई देशों मे विश्व हिन्दी दिवस मनाया जाता है परन्तु वहा अलग समय पर मनाया जाता है जहॉ १० जनवरी को लोग अपने अपने तरीके से विश्व हिन्दी दिवस मनाते है ! पहला हिन्दी दिवस देश मे १९५३ मे मनाया गया था ! जहॉ कई राष्ट्रों के प्रतिनिधि शामिल हुऐ थे !
  हिन्दी के सम्बन्ध मे एक बात और बताना चाहूंगा १९१८ मे महात्मा गॉधी ने इसे जनमानस की भाषा कहा था ! तथा हिन्दी को राष्ट्रभाषा का सम्मान देने की बात कही थी ! लेकिन आजादी के मिलने के बाद ऐसा कुछ नहीं हुआ सत्ता मे काबिज लोगों और जाति भाषा के नाम पर राजनीति करने वालों ने हिन्दी को राष्ट्र भाषा बनने नहीं दिया ! 
स्वतंत्रता के बाद हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने के लिए काका कालेलकर मैथली शरण गुप्त हजारी प्रसाद द्विवेदी सेठ गोबिन्द दास और राजेन्द्र सिंह आदि लोगों ने बहुत प्रयास किऐ जिसे लेकर कई बार दक्षिण भारत का दोरा भी किया ! 
२६ जनवरी १९५० को भारतीय संविधान लागू होने के साथ राजभाषा नीति भी लागू हुई संविधान के अनुच्छेद ३४३(१) के तहत यह स्पष्ट किया गया कि भारत की राजभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी है ! हिन्दी के अतरिक्त अंग्रेजी भाषा का प्रयोग भी सरकारी काम काजों मे किया जा सकता है ! अनुच्छेद ३४३(२) के अन्तर्गत यह भी व्यवस्था की गई कि संविधान के लागू होने के समय से १५ वर्ष की अवधि तक यानी १९६५ तक संघ के सभी सरकारी कार्यों के लिए पहले की भॉति अग्रेजी भाषा का प्रयोग होता रहेगा ! यह व्यवस्था इस लिए की गई थी कि इस बीच हिन्दी न जानने वाले हिन्दी सीख जायेंगे और हिन्दी भाषा को प्रशासनिक कार्यों के लिए सभी प्रकार से सक्षम बनाया जायेगा !
१९६५ मे १५ वर्ष पूरे हो गये थे लेकिन उसके बाद भी अग्रेजी को हटाया नहीं गया और अनुच्छेद ३३४(३) मे संसद को यह अधिकार दिया गया कि वह १९६५ के बाद भी काम काज मे अग्रेजी का प्रयोग जारी रखने के बारे मे व्यवस्था कर सकती है ! तथा अग्रेजी और हिन्दी दोनों भारत की राजभाषा हैं ! 
आज के दिन स्कूलों कालेजों मे हिन्दी दिवस पर विविध कार्यकृमों का आयोजन होता है जिसमे हिन्दी मे कविता भाषण और हिन्दी के संरक्षण पर निबन्ध आदि कार्यकृम आयोजित किए जाते हैं।