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यहाँ हनुमान जी की छाती के छेद में से निरंतर जल बहता रहता है
June 21, 2019 • Apoorva

हमारे भारत में हनुमान जी के अनेक मंदिर है। और आज हम बात करेंगे राजस्थान के दौसा जिले में स्थापित मेहँदीपुर बालाजी की जहाँ लोगो के जाने से  हर प्रकार का सुख मिलता है। यहाँ अपनी मनोकामनाओ और बाला जी के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से भक्तजन आते है। लकिन जो यहाँ पहले बार आता है तो वह यह का नजारा देख कर हाका-बका रह जाता है। वैसे आपको बता दे की बालाजी भूत-प्रेत से या हवा लगने से ऐसी चीजों के लिए ज्यादा माना जाता है। यहाँ प्रेतात्मा को सजा देने के लिए तगड़ी-से-तगड़ी सजा दी जाती है। यह इलाज पुलिस की किसी थर्ड डिग्री से कम नहीं होता।

 

बालाजी की बायीं छाती में है छेद

बालाजी की छाती के छेद में से निरंतर जल बहता रहता है। ऐसा मानते है कि यह बालाजी का पसीना है। इस मंदिर में 3 देवता विराजित है एक तो पवन पुत्र हनुमान दूसरे प्रेतराज और तीसरे भैरों जिन्हें कप्तान भी कहा जाता है।

 

 अब बात करते है यहाँ के प्रशाद की

कहते हैं कि बालाजी के प्रसाद के दो लड्डू खाते ही भूत-प्रेत से पीड़ित व्यक्ति के अंदर मौजूद भूत प्रेत छटपटाने लगता है और अजब-गजब हरकतें करने लगता है। यहां बालाजी को लड्डू, प्रेतराज को चावल और भैरों को उड़द का प्रसाद चढ़ाया जाता  है। महेंदीपुर में चढ़ाया गया प्रशाद या अन्य कोई भी खाने की चीज  वापस घर नहीं लायी जा सकता है। इस मंदिर का यह धर्म भी अनोखा है कि यहाँ  प्रशाद  नहीं चढ़ाया जा सकता है। खासतौर पर यहाँ से मिठाई चीजे वापस लेकर जाना मना है क्युकी शास्त्रों के अनुसार मीठी चीजों पर भूत-प्रेत का जल्दी साया होता है।

यहां के प्रसाद को कहते हैं दर्खावस्त और अर्जी

यहां पर चढ़ने वाले प्रसाद को दर्खावस्त और अर्जी कहा जाता हैं। जब वहा मदिंर में पहुँच जाते है तब और वहाँ से आते वक़्त दर्खावस्त लगती है। मंदिर में दर्खावस्त का प्रसाद लगने के बाद वहां से तुरंत निकलना होता है। दर्खावस्त लगाने के बाद ही उस समस्या का हाल निकलता है उससे पहले नहीं। जैसे स्कूल में बच्चे का जब तक एडमिशन नहीं होता तब तक उसको उस स्कूल का नहीं माना जाता। उसी तरह दर्खावस्त लगने के बाद ही आपकी परेशानी का हाल निकाला जा सकता है। जबकि अर्जी का प्रसाद लेते समय उसे पीछे की ओर फेंकना होता है। इस प्रक्रिया में प्रसाद फेंकते समय पीछे की ओर नहीं देखना चाहिए।

यहाँ के जल के छीटें से मिलती है प्रेत साया से मुक्ति

बालाजी जाएं तो सुबह और शाम की आरती में शामिल होकर आरती के छीटें लेने चाहिए। यह रोग मुक्ति एवं ऊपरी चक्कर से रक्षा करने वाला होता है।

अब बात करते है यहाँ के कुछ सख्त नियमो की

यहाँ पर आने से पहले लहसुन प्याज अंडा मास-मची इन सब चीजों का सेवन सख्त माना है। दर्खावस्त लगने के बाद  41 दिन तक का परेज होता है जिसमे आप  लहसुन प्याज अंडा मास-मची इन सब चीजों का सेवन  नहीं कर सकते न ही किसी के घर का खा सकते न ही किसी के घर जा सकते|

अब हम आपको एक ऐसा मन्त्र बताने जा रहे है जिसको पढने से बाहरी बिमारियों से 21 दिनों में ही ठीक हो जायेंगे

 मनुष्य जब भूत-प्रेत अथवा नजर,  हाय या किसी दुष्ट आत्मा के जाल में फँस जाता है तब वह परेशान हो जाता है। ऐसे में पवन पुत्र हनुमान जी की आराधना करें। मरीज अवश्‍य ही ठीक हो जाएगा। हम आपको एक ऐसा मन्त्र  बताने जा रहे है जिसको पढ़ने से मरीज अवश्‍य ही ठीक हो जाएगा। जो कि इक्कीस दिन में सिद्ध हो जाता है।

ॐ हनुमान पहलवान पहलवान, बरस बारह का जबान,

हाथ में लड्‍डू मुख में पान, खेल खेल गढ़ लंका के चौगान,

अंजनी‍ का पूत, राम का दूत, छिन में कीलौ

नौ खंड का भू‍त, जाग जाग हड़मान

हुँकाला, ताती लोहा लंकाला, शीश जटा

डग डेरू उमर गाजे, वज्र की कोठड़ी ब्रज का ताला

आगे अर्जुन पीछे भीम, चोर नार चंपे

ने सींण, अजरा झरे भरया भरे, ई घट पिंड

की रक्षा राजा रामचंद्र जी लक्ष्मण कुँवर हड़मान करें।

इसे सिद्ध करके दूसरों की सहायता करें और उनकी प्रेत-डाकिनी, नजर आदि सब ठीक करें।

 

 

हमारे भारत में हनुमान जी के अनेक मंदिर है। और आज हम बात करेंगे राजस्थान के दौसा जिले में स्थापित मेहँदीपुर बालाजी की जहाँ लोगो के जाने से  हर प्रकार का सुख मिलता है। यहाँ अपनी मनोकामनाओ और बाला जी के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से भक्तजन आते है। लकिन जो यहाँ पहले बार आता है तो वह यह का नजारा देख कर हाका-बका रह जाता है। वैसे आपको बता दे की बालाजी भूत-प्रेत से या हवा लगने से ऐसी चीजों के लिए ज्यादा माना जाता है। यहाँ प्रेतात्मा को सजा देने के लिए तगड़ी-से-तगड़ी सजा दी जाती है। यह इलाज पुलिस की किसी थर्ड डिग्री से कम नहीं होता।

 

बालाजी की बायीं छाती में है छेद

बालाजी की छाती के छेद में से निरंतर जल बहता रहता है। ऐसा मानते है कि यह बालाजी का पसीना है। इस मंदिर में 3 देवता विराजित है एक तो पवन पुत्र हनुमान दूसरे प्रेतराज और तीसरे भैरों जिन्हें कप्तान भी कहा जाता है।

 

 अब बात करते है यहाँ के प्रशाद की

कहते हैं कि बालाजी के प्रसाद के दो लड्डू खाते ही भूत-प्रेत से पीड़ित व्यक्ति के अंदर मौजूद भूत प्रेत छटपटाने लगता है और अजब-गजब हरकतें करने लगता है। यहां बालाजी को लड्डू, प्रेतराज को चावल और भैरों को उड़द का प्रसाद चढ़ाया जाता  है। महेंदीपुर में चढ़ाया गया प्रशाद या अन्य कोई भी खाने की चीज  वापस घर नहीं लायी जा सकता है। इस मंदिर का यह धर्म भी अनोखा है कि यहाँ  प्रशाद  नहीं चढ़ाया जा सकता है। खासतौर पर यहाँ से मिठाई चीजे वापस लेकर जाना मना है क्युकी शास्त्रों के अनुसार मीठी चीजों पर भूत-प्रेत का जल्दी साया होता है।

यहां के प्रसाद को कहते हैं दर्खावस्त और अर्जी

यहां पर चढ़ने वाले प्रसाद को दर्खावस्त और अर्जी कहा जाता हैं। जब वहा मदिंर में पहुँच जाते है तब और वहाँ से आते वक़्त दर्खावस्त लगती है। मंदिर में दर्खावस्त का प्रसाद लगने के बाद वहां से तुरंत निकलना होता है। दर्खावस्त लगाने के बाद ही उस समस्या का हाल निकलता है उससे पहले नहीं। जैसे स्कूल में बच्चे का जब तक एडमिशन नहीं होता तब तक उसको उस स्कूल का नहीं माना जाता। उसी तरह दर्खावस्त लगने के बाद ही आपकी परेशानी का हाल निकाला जा सकता है। जबकि अर्जी का प्रसाद लेते समय उसे पीछे की ओर फेंकना होता है। इस प्रक्रिया में प्रसाद फेंकते समय पीछे की ओर नहीं देखना चाहिए।

यहाँ के जल के छीटें से मिलती है प्रेत साया से मुक्ति

बालाजी जाएं तो सुबह और शाम की आरती में शामिल होकर आरती के छीटें लेने चाहिए। यह रोग मुक्ति एवं ऊपरी चक्कर से रक्षा करने वाला होता है।

अब बात करते है यहाँ के कुछ सख्त नियमो की

यहाँ पर आने से पहले लहसुन प्याज अंडा मास-मची इन सब चीजों का सेवन सख्त माना है। दर्खावस्त लगने के बाद  41 दिन तक का परेज होता है जिसमे आप  लहसुन प्याज अंडा मास-मची इन सब चीजों का सेवन  नहीं कर सकते न ही किसी के घर का खा सकते न ही किसी के घर जा सकते|

अब हम आपको एक ऐसा मन्त्र बताने जा रहे है जिसको पढने से बाहरी बिमारियों से 21 दिनों में ही ठीक हो जायेंगे

 मनुष्य जब भूत-प्रेत अथवा नजर,  हाय या किसी दुष्ट आत्मा के जाल में फँस जाता है तब वह परेशान हो जाता है। ऐसे में पवन पुत्र हनुमान जी की आराधना करें। मरीज अवश्‍य ही ठीक हो जाएगा। हम आपको एक ऐसा मन्त्र  बताने जा रहे है जिसको पढ़ने से मरीज अवश्‍य ही ठीक हो जाएगा। जो कि इक्कीस दिन में सिद्ध हो जाता है।

ॐ हनुमान पहलवान पहलवान, बरस बारह का जबान,

हाथ में लड्‍डू मुख में पान, खेल खेल गढ़ लंका के चौगान,

अंजनी‍ का पूत, राम का दूत, छिन में कीलौ

नौ खंड का भू‍त, जाग जाग हड़मान

हुँकाला, ताती लोहा लंकाला, शीश जटा

डग डेरू उमर गाजे, वज्र की कोठड़ी ब्रज का ताला

आगे अर्जुन पीछे भीम, चोर नार चंपे

ने सींण, अजरा झरे भरया भरे, ई घट पिंड

की रक्षा राजा रामचंद्र जी लक्ष्मण कुँवर हड़मान करें।

इसे सिद्ध करके दूसरों की सहायता करें और उनकी प्रेत-डाकिनी, नजर आदि सब ठीक करें।