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योगी सरकार को सुप्रीम कोर्ट की फटकार पत्रकारों की गिरफ्तारी पर रोक
June 11, 2019 • Gulshan Verma

 


उत्तर प्रदेश । योगी सरकार की मनमानियों और ज्यादतियों पर आखिर कार कोर्ट ने रोक लगा ही दी सुप्रीम कोर्ट ने योगी सरकार को एक बड़ा झटका दिया है जिसे मनमाने ढंग से सरकार चलने के रवैये पर अब रोक लगी है। गौरतलब है की उत्तर प्रदेश में पत्रकार पकड़ो और जेल में डालो अभियान चल रहा है जिसकी शुरवात पत्रकार प्रशांत कनौजिया से हुई थी प्रशांत एक फ्री लांसर पत्रकार हैं। उन्हें ये कहता हुए उनके घर से उठा लिया गया था की प्रशांत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की छवि खराब करने की कोशिश की है वीडिओ अपने सोशल मीडिया पर शेयर कर के जिसे न तो उन्होंने बनाया था और नहीं उस वीडिओ में वो मौजूद थे बस एक महिला नज़र आ रही थी । महिला का नाम हेमा श्रीवास्तव बताया जा रहा है जो तलकशुदा है और ये दावा करती हुई नज़र आ रही है की वो मुख्यमंत्री योगी से प्रेम करती है । इस वीडियो को पत्रकार प्रशांत कनौजिया ये कैप्शन लिखते हुए अपनी सोशल मीडिया वाल पर शेयर कर देते हैं और बस इस कारण उनके खिलाफ शिकायत दर्ज़ होती है और उन्हें सलाखों के पीछे डाल दिया जाता है। जिसके बाद योगी सरकार की इस हरकत की निंदा भी बहुत हुई ।

मामला गंभीर होते देख पत्रकार की पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया और उसके बात जो फैसला कोर्ट ने दिया उससे पत्रकार को रहत मिली है मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो कोर्ट ने ज़ोरदार फटकार लगाई है मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ को और उत्तर प्रदेश पुलिस को भी और साथ-ही-साथ पत्रकार प्रशांत कनोजिया को तुरंत रिहा करने का आदेश भी जारी किया है। गौरतलब है की पत्रकार प्रशांत पर धारा 505 के तहत शिकायत दर्ज़ करने के बाद उसे 11 दिनों की न्यायिक हिरसत में भेज दिया गया था। वहीँ आज कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए आज आदेश दिया की पत्रकार को रिहा किया जाये और ये भी कहा की किसी की राये अलग हो सकती है लेकिन इस तरह किसी निजी स्वतंत्रता का हनन ग़लत और ग़ैर क़ानूनी है।

अदालत में पत्रकार प्रशांत की पत्नी जागीशा ने जज के सामने ये दलील दी की पत्रकार प्रशांत को बिना अरेस्ट मेमो बनाये हिरासत में लिया गया और न ही उन्हें FIR की कॉपी दी गई । बताते चलें की अदालत ने तीखे शब्दों में उत्तर प्रदेश पुलिस के इस कारनामे की निंदा की है और
साथ ये चेतावनी दे डाली की अगर UP सरकार किसी भी नागरिक की निजी आज़ादी का हनन करेगी तो न्यायालय को हस्तक्षेप करना ही होगा