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  शमशान घाट में भूल कर भी न करे ये सब काम
June 30, 2019 • अपूर्वा गोस्वामी

 

            

जैसा की आप सबको पता हैं कि हिन्दू धर्म एक मात्र ऐसा धर्म हैं जिसमे न जाने कितने रीति-रिवाज और परम्परायें हैं। यह बात भी आपको बता दे कि हिन्दू धर्म में बच्चे के जन्म से लेकर उसकी मृत्यु तक पुरे 16 संस्कार होते हैं। और इंसान की ज़िन्दगी का जो आखिरी संस्कार होता हैं वह अंतिम संस्कार हैं। ऐसी मान्यतय हैं कि गरुड़ पुराण में इंसान का अंतिम संस्कार करके उसके बाद 13 दिन की तेरवी के बाद दुबारा से घर का शुद्धि करण होता हैं। और साथ-ही-साथ इस गरुड़ पुराण में इंसान की मृत्यु के बारे में और भी बाते बताई गई हैं जिनको आपने आज तक सुना तक नहीं होगा। और आज हम आपको इस रिपोर्ट में गरुड़ पुराण में लिखी कुछ बातो के बारे में बताएँगे।

सबसे पहले ये देखते हैं कि सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार क्यों नहीं किया जाता हैं?

गरुड़ पुराण में यह बात साफ़-साफ़ लिखी हैं कि सूर्यास्त के बाद देह संस्कार नहीं किया जाता हैं। यह बात हम सब बहुत अच्छे से जानते हैं कि अगर किसी इंसान की मृत्यु रात के समय हुई हैं तो उसका देह संस्कार अगले दिन सुबह के समय ही होगा। लेकिन आपको यह पता हैं ऐसा क्यों होता हैं? आइये हम आपको बताते हैं।

ऐसी मान्यतया हैं की सूर्यास्त के बाद देह संस्कार करने से मृतक आदमी की आत्मा को परलोक में बहुत कष्ट  झेलने पड़ते हैं। और इतना ही नहीं अगले जन्म में उसके किसी अंग में खराबी हो सकती हैं। यही कारण हैं की देह संस्कार सूर्यास्त के बाद नहीं किया जाता हैं।

क्यों करते है देह संस्कार के समय छेद वाली मटकी के साथ परिक्रमा?

अगर आपने गौर किया होगा कि देह संस्कार के समय एक छेद वाली मटकी में जल लेकर शोक की परिक्रमा की जाती हैं| और इसे पटक कर फोड़ दिया जाता हैं| ऐसी मान्यता हैं कि मृत इन्सान का उसके शरीर से मोह भंग करने के लिये ऐसा किया जाता हैं| लेकिन इतना ही नहीं इसके पीछे एक और रहस्य हैं| कहा जाता हैं कि हमारा जीवन मटके की तरह मृत होता हैं| और इस मटके में भरा पानी हमारा समय होता हैं| इसका मतलब हैं की यह आयु रूपी पानी हर पल टपकता रहता हैं| और अंत में इन्सान अपना सब कुछ छोड़ कर भगवन के पास चला जाता हैं| 

इस बात को सुनकर आपको कोई हैरानी नहीं होगी की महिलाएं शमशान घाट नहीं जाती हैं लेकिन आपको यह नहीं पता होगा की ऐसा क्यों होता हैं?

अंतिम संस्कार का समय ऐसा होता हैं जहाँ पर महिलाओं का शमशान घाट जाना हिन्दू धर्म में बिलकुल वर्जित होता हैं। और यह बात भी बिलकुल स्पष्ट हैं कि इंसान का शव जब घर से शमशान घाट की ओर ले जाते हैं तो उसके बाद पुरे घर की सफाई की जाती हैं। जिससे नकारात्मक शक्ति घर में न रह सके। इसलिए घर के कामों के लिए महिलाओं को घर पर रखा जाता हैं। ऐसा कहा जाता हैं कि भूत का सबसे पहला निशाना महिलाए होती हैं इसलिए उनका शमशान घाट जाना बिलकुल वर्जित हैं।

हिन्दू रिवाज के अनुसार जो व्यक्ति शमशान घाट जाता हैं और मुखाग्नि देता हैं उसको अपने बाल वही पर छोड़ कर आने होते हैं मतलब की वह इंसान गांजा हो जाता हैं। और इसमें कोई सोचने वाली बात नहीं हैं की महिलाओं को गंजापन शोभा नहीं देता हैं इसलिए महिलाओं को शमशान घाट नहीं ले कर जाया जाता।

और एक यह भी बात हैं कि लड़किया या महिलाएं बहुत नरम दिल की होती हैं वह ऐसे टाइम पर अपना रोना नहीं रोक पाती हैं। और ये बात भी सच हैं कि शमशान घाट पर रोना यानि कि मृत व्यक्ति की आत्मा को शांति न पहुँचाना। इंसान के मरने पर उसकी आत्मा को शांति मिले इसलिए औरतों को शमशान घाट पर शामिल नहीं किया जाता हैं।

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