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शहीद भगत सिंह के जन्मदिन पर कुछ यादगार बातें
September 28, 2019 • अपूर्वा गोस्वामी

इस बात में कोई शक नहीं की हमारे देश को आज़ाद करवाने के लिये बहुत से बलिदान किये गए हैं| जैसा की आप सब जानते ही हैं हमारे देश को आज़ाद करवाने के लिये कई शहीदों ने अपनी जान की बाज़ी लगाई हैं| और इन्ही शहीदों में से एक हैं शहीद भगत सिंह जिन्होंने देश के लिये हँसते-हँसते अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे| आज यानि की 28 सितम्बर को उनकी जयंती हैं| शहीद भगत सिंह का जन्म पंजाब के लायपुर जिले के बगा में 28 सितम्बर 1907 को हुआ था| ये बात तो आप सब जानते ही हैं कि 23 मार्च 1931 की रात को लाहौर षड्यंत्र के आरोप में सुखदेव, राजगुरु और भगत सिंह को फ़ासी पर लटका दिया था| आज हम उनकी जयंती पर उनके 5 विचार आपको बताने जा रहे हैं|

1-    राख का हर कण मेरी गर्मी से गतिमान हैं मैं एक ऐसा पागल हूं जो जेल में आज़ाद हैं|

2-    ज़िन्दगी तो सिर्फ अपने कंधो पर जी जाती हैं, दूसरों के कंधो पर तो सिर्फ जनाजे उठाये जाते हैं|

3-    वे मुझे कतल सकते हैं मेरे विचारों को नहीं वे मेरे शरीर को कुचल सकते हैं लेकिन मेरे जज्बे को नहीं|

4-    मेरे सीने में जो जख्म हैं वो जख्म नहीं फूलों के गुच्छे हैं, हमे  तो पागल ही रहने दो हम पागल ही अच्छे हैं|

5-    मेरा एक ही धर्म हैं और वो हैं देश की सेवा करना|

अब आज भगत सिंह की बात हम सबने शुरू कर ही दी हैं तो इसी के चलते आज आपको भगत सिंह के कुछ नारे भी बता देते हैं जिनको सुनकर आपके अंदर देशभक्ति की भावना जाग जाएगी| जिसमे से पहला नारा था जिसे आज़ादी लेने में सबसे ज्यादा श्रेय दिया गया हैं| ये नारा हैं-

1-    इंकलाब जिंदाबाद

इसके बाद दूसरा नारा जो उस समय के बच्चे से लेकर बुडे तक की ज़ुबान पर राटा हुआ था| वो नारा हैं-

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैं,

देखना हैं ज़ोर कितना बाज़ुए कातिल में हैं| हलाकि ये लाइने अमर शहीद राम प्रसाद बिस्मिल की हैं लेकिन ये शहीद भगत सिंह भी काफी शिदत से बोला करते थे|

इसके बाद सबसे आखरी ज़ुमला जो उनका आज तक याद रखा गया हैं वो हैं-

मेरा रंग दे बसंती चोला|

हम आपको बता दे की ये ज़ुमला उन्होंने अपने आखरी समय में अपने साथियों के साथ मिल कर गाया था जिसकी गूंज पुरे जेल में गूंज रही थी|

प्रोग्राम का अन्त शहीद भगत सिंह की इन पंक्तियों से करते हैं 

        लिख रहा हूं मैं अंजाम जिसका कल आगाज आएगा,

        मेरे लहू का हर एक कतरा इंकलाब लायेगा|

        मैं रहूँ या न रहूँ पर यह, वादा हैं तुमसे मेरा

        कि मेरे बाद वतन पे मरने वालों का सेलाब आएगा|