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शीला दीक्षित और उनके पति विनोद दीक्षित की लव स्टोरी
July 21, 2019 • रजत राज गुप्ता

नई दिल्ली। दिल्ली की 3 बार सी एम रहे चुकीं शीला दीक्षित की कल अकस्मक तौर से निधन हो गया । जिसके बाद पूरे भारत में सारे राजनीतिज्ञ ग़म में है। लेकिन दिल्ली के सी एम अरविन्द केजरीवाल जहाँ एक तरफ शीला दीक्षित के जाने के बाद ग़म और सांत्वना दिखा रहे है वहीँ कहीं न कहीं अंदर से वे बहुत खुश होंगे क्यों की उनके खिलाफ दिल्ली के सी एम के चुनावों में सिर्फ एक वहीँ थी जो उन्हें सी एम पद के लिए टककर दे सकती थी। यह तो बात हुई उनकी राजनीतिक जीवन की जिसके बारे में सबको पता है लेकिन आपको उनकी पर्सनल लाइफ के बारे में शायद ही कुछ पता होगा। तो चलिए आज हम आपको अपनी इस रिपोर्ट में शीला दीक्षित और उनके पति विनोद दीक्षित की लव स्टोरी के बारे में बताते हैं।

शीला दीक्षित ने दिल्ली विश्वविद्यालय में प्राचीन इतिहास की पढ़ाई की थी जिसके दौरान ही शीला की मुलाकात विनोद दीक्षित से हुई । विनोद कांग्रेस के बड़े नेता उमाशंकर दीक्षित के इकलौते बेटे थे। उन्होंने बताया की विनोद अपने साथियों के बीच काफी फेमस थे और वे अच्‍छे क्रिकेटर भी थे। संयोग से उनके दोस्‍तों के प्रेम विवाद को सुलझाने के लिए दोनों ने एक दूसरे से बात की थी, लेकिन अपने दोनों दोस्तों के प्रेम विवाद को सुलझाते सुलझाते खुद ही प्यार के चक्कर में उलझ गए। क्योंकि विनोद का  स्वभाव थोड़ा जिद्दी और अकड़ने वाला था जिसकी वजह से शुरुआत में शीला को विनोद कुछ ज्यादा अच्छे नहीं लगे थे। लेकिन विनोद तो शीला के पास आने का एक भी मौका नही छोड़ते थे, उनकी हमेशा यही कोशिश रहती थी कि वे हमेशा उनके साथ रहें। जिसकी वजह से दोनों डीटीसी की 10 नंबर की बस में घर जाया करते थे। विनोद अक्सर शीला के साथ फिरोज शाह रोड जाया करते थे, ताकि वो उनके साथ अधिकतर समय बिता सकें। इसी बीच शीला और विनोद में दोस्ती हो गयी और अचानक से एक दिन बस में सफर के दौरान चांदनी चौक के सामने विनोद ने शीला को प्रपोज किया लेकिन हाथों में गुलाब ले कर या फिर कोई गिफ्ट दे कर नहीं बल्कि अलग अंदाज़ में उन्होंने कहा, मैं माँ से कहने जा रहा हूँ कि मुझे वो लड़की मिल गई है जिससे मुझे शादी करनी है। इस पर शीला ने विनोद से पूछा कि तुमने किस लड़की से इस बारे में बात की है? विनोद ने जवाब दिया, 'नहीं मैंने किसी से बात नहीं की है, लेकिन वो लड़की इस समय मेरे बगल में बैठी हुई है।' बाद में शीला दीक्षित ने कहा कि मैं ये सुनकर हैरान रह गई। उस समय तो शीला ने कुछ नहीं बोला, लेकिन घर आ कर खुशी में खूब नाची। शीला ने उस समय इस बारे में अपने माँ-बाप को कुछ नहीं बताया, क्योंकि वो जरूर पूछते कि लड़का करता क्या है? तो वे उनसे क्या बताती कि विनोद तो अभी पढ़ रहे हैं।' शीला ने बताया कि एक दिन लखनऊ से अलीगढ़ आते समय विनोद की ट्रेन छूट गई थी तो उन्होंने मुझसे अनुरोध किया कि मैं उन्हें ड्राइव कर कानपुर तक छोड़ दूँ ताकि वो वहाँ से अपनी ट्रेन पकड़ लें। इस बारे में शीला ने बताया कि वो रात में ही भारी बारिश के बीच विनोद को अपनी कार में बैठा कर 80 किलोमीटर दूर कानपुर ले गयीं थी। और वो इस दौरान अलीगढ़ वाली ट्रेन पर चढ़ गए थे। दो साल बाद इन दोनों की शादी हुई लेकिन विनोद के परिवार में इसका काफी विरोध किया क्योंकि शीला ब्राह्मण नहीं थी। विनोद ने 'आईएएस' की परीक्षा दी और पूरे भारत में नौंवा स्थान हासिल किया जिसके बाद उन्हें उत्तर प्रदेश काडर मिला।

आगे चलकर शीला दीक्षित ने अपने ससुर उमाशंकर दीक्षित से राजनीति के गुन सीखे, जो इंदिरा गांधी मंत्रिमंडल में गृह मंत्री थे और बाद में कर्नाटक और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल भी बने। शीला दीक्षित के पति का दिहांत ट्रेन के डिब्‍बे में हार्टअटैक आने की वजह से हुई थी। परिवार में उनके एक बेटे पूर्व सांसद संदीप दीक्षित और बेटी लतिका दीक्षित हैं, जिन्हें उन्होंने अकेले बड़ा किया।