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श्रीलंका में हो रहा है मुस्लमानों का ज़बरन धर्म परिवर्तन
June 26, 2019 • Rajat Raj Gupta

नई दिल्ली। जैसा की हम जानते है की देश में जितना मुस्लिम धर्म आतंकिओं की वजह से बदनाम है उतना कोई और नहीं है। दुनिया भर में मुस्लिम धर्म को कुछ नापाक आतंकिओं की वजह से बेइज्जती का सामना करना पड़ता है। लेकिन श्री लंका में मुस्लिम अपनी ही बनायीं मस्जिदों को तोड़ रहे हैं। जी हाँ आपने सही सुना फेसबुक पे एक ऐसी पोस्ट वायरल हो रही है जिसमे श्री लंका के मुस्लिम अपने हाथों से ही अपनी बनाई हुई मस्जिदों को तोड़ रहे है लेकिन इस बात के पीछे की असली सच्चाई क्या है। आईये जानते है।

 

आज कल के समय में तो सोशल मीडिया पर हर कोई है चाहे वो फेसबुक हो या फिर ट्विटर हर किसी का इन सोशल मीडिया साइटस पर अकॉउंट है और इन्हीं सोशल मीडिया पर कुछ ऐसी पेज भी है जो चुटकुले और जोक्स बना कर डालते है ताकि उनकी वजह से लोगों का मनोरंजन हो सके। लेकिन अभी कुछ समय पहले फेसबुक पर एक ऐसी फोटो वायरल हो रही थी जिसमे कुछ मुस्लिम मस्जिद को तोड़ रहे है और उन फोटो के कैप्शन में लिखा है की - "श्रीलंका के मुस्लमान अपना धर्म परिवर्तन कर रहे है। उनको मुस्लिम धर्म की असलियत समझ आ गयी है जिसकी वजह से वे ऐसा कर रहे है।" लेकिन इस फोटो में कितनी सचाई है आईये जानते है।

 

यह खबर एक अख़बार की वेबसाइट पर डाली गयी थी जिसमे बताया गया था की श्रीलंका के मुस्लमान वहां पर बनी एक मस्जिद को तोड़ रहे है। उस रिपोर्ट में लिखा था की- “राष्ट्रीय तौहीद जमात द्वारा उपयोग में ली गई मस्जिद को कल मादातुगामा जो की श्रीलंका के केकिरावा में है,  उससे और बाकि मुख्य मस्जिद को मुस्लिमों द्वारा तोड़ दिया गया”। रिपोर्ट में आगे बताया गया कि, “मुख्य मस्जिद के ट्रस्टी M H M अकबर खान ने बताया कि NTJ  द्वारा बनाई गई मस्जिद को विदेशी देशों के संगठनो के फंड्स से बनाया गया था। मस्जिद के अलावा लोगों ने अरबी शिलालेख की तख्ती को भी तोड़ दिया था। इस विनाश के वीडियो को श्रीलंका के एक न्यूज़ चैनल ने भी अपलोड किया था, जिसमें लोगों को हथौड़े से नीले रंग की ईमारत को तोड़ते हुए देखा जा सकता था।

 

एक मीडिया एजेंसी जब इस वीडियो की जाँच की तो पता चला की इसमें किसी भी तरह कोई भी धर्म परिवर्तन नहीं हुआ है, इस मीडिया संगठन ने वहां के पुलिस इंचार्ज तिलक बान्दारा गानेगोडा से इस वायरल वीडियो के दावे के बारे में बात की तो पुलिस ने बताया कि,”कोई धर्म रूपांतर की घटना नहीं हुई है। पहले बच्चों के पुस्तकालय के निर्माण के लिए यह ज़मीन आवंटित की गई थी और उसे बाद में उसके असली मालिक को सौंप दिया गया था”।

 

समाचार एजेंसी के अनुसार, अकबर खान नाम के शख्श ने इस इमारत को तोड़ने के लिए सबसे पहले आंदोलन किया था। उन्होंने कहा था कि,”इसे इसलिए नहीं तोड़ा गया क्योंकि ईमारत और NTJ के बीच कोई तकरार थी या कोई धर्म परिवर्तन की घटना हुई थी”।  उन्होंने श्रीलंका के एक लोकल न्यूज़ चैनल को बताया कि - "मस्जिद को विदेशी फंड की वजह से तोड़ा गया है।" इसे लोकल न्यूज़ चैनल के डिप्टी एडिटर ने भी ट्वीट किया था।

 

हम आपको बता दें की NTJ श्रीलंका का एक इस्लामिक ग्रुप है, जिसका नाम 2019 के ईस्टर विस्फोट में आया था और इस हमले में लगभग 250 से अधिक लोगों की जान गयी थी। इस खबर पर श्री लंका के काफी न्यूज़ चैनल ने ख़बरें प्रकाशित करी है जिसमे कही भी यह नहीं लिखा है की इस घटना के दौरान धर्म परिवर्तन जैसा कुछ भी हुआ था।

 

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