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  तीस हजारी कोर्ट से जुड़ा है 31 साल पुराना ये केस.
November 29, 2019 • अर्पण न्यूज़ ब्यूरो

 

तीस हज़ारी कोर्ट में बीते शनिवार को पुलिस और वकीलों के बीच हाथापाई हो गयी थी जो फिर इतनी बाद गयी की वकीलों ने हर जगह दिखाए दे रहे पुलिस कर्मियों को मारना शुरू कर दिया. जिसकी वजह से कल पुलिस कमिश्नर के दफ्तर के बहार पुलिस वालों ने नारे लगाए और कहा की उन्हें किरण बेदी अपनी पुलिस कमिश्नर के रूप में चाहिए जिसके बाद अब किरण बेदी भी दिल्ली पुलिस के साथ आ गयी है.

 

किरण बेदी इन दिनों पुदुचेरी की उपराज्यपाल हैं पर उन्होंने दिल्ली में हुए तीस हज़ारी केस के बारे में सुन कर दिल्ली पुलिस का साथ दिया और कहा की दिल्ली पुलिस अपने रुख पर दृढ़ता से कायम रहे चाहे नतीजा कुछ भी हो. इसी बात को कहते हुए किरण बेदी को दिल्ली में हुए आज से 31 साल एक केस के बारे में याद आ गया क्यूंकि उस समय भी वकीलों और पुलिस वालों की ऐसे ही स्तिथि थी. दरअसल मामला ये था की, 1988 में आईपीएस किरण बेदी दिल्ली में डीसीपी नॉर्थ के पद पर तैनात थीं. 15 जनवरी 1988 को दिल्ली पुलिस ने एक वकील को सेंट स्टीफेंस कॉलेज से एक लड़की का पर्स चुराते हुए गिरफ्तार किया. जब 16 जनवरी को इस वकील को हथकड़ी लगाकर तीस हजारी कोर्ट में मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया तो वहां पर मौजूद वकील पुलिस पर भड़क गए और उन्होंने आरोपी वकील को तत्काल छोड़ने की मांग की और उन पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. मजिस्ट्रेट ने गिरफ्तार किये गए वकील को उसी दिन छोड़ने का आदेश दे दिया और दिल्ली पुलिस के कमिश्नर को आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ एक्शन लेने को कहा.

 

18 जनवरी को वकील अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गए. जिसके बाद 20 जनवरी को  किरण बेदी ने एक बयान जारी किया और पुलिस के एक्शन को सही करार दिया, उन्होंने कथित 'चोर' को छोड़ने के लिए मजिस्ट्रेट की आलोचना भी की. इसके अगले दिन यानि 21 जनवरी को कुछ वकील किरण बेदी से उनके दफ्तर में मिलने गए थे. उस दौरान किरण बेदी का दफ्तर तीस हजारी कोर्ट कॉम्पलेक्स में ही मौजूद था. तब पुलिस को लाठी चार्ज का आदेश दे दिया गया जिसमें कई वकील घायल हो गए थे और इसके बाद से दिल्ली में हंगामा हो गया. वकील किरण बेदी के इस्तीफे की मांग करने लगे और वकीलों ने 2 महीने तक काम नहीं किया.

 

वकीलों ने किरण बेदी पर आरोप लगे की उन्होंने अत्यधिक बल का प्रयोग किया है, लेकिन किरण बेदी ने कहा कि पुलिसवाले उनके दफ्तर में जबरन घुस आए थे, वे गालियां दे रहे थे और कपड़े फाड़ दे रहे थे, इसके बाद पुलिस को मजबूरन बल प्रयोग करना पड़ा. वहीँ इसके बाद हाई कोर्ट ने इस मामले दखल दिया और 2 जजों की एक कमिटी को इस केस पर निर्णय लेने के लिए कहा.

 

इसी बात को याद करते हुए किरण बेदी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, गिरफ्तारी के वक्त उस शख्स ने अपना परिचय एक वकील के रूप में नही दिया था, उस शख्स ने पुलिस को अपना नाम भी दूसरा बताया था. उस वक्त के पुलिस कमिश्नर वेद मारवाह पूरी मजबूती के साथ मेरे साथ खड़े रहे थे. तीस हजारी कोर्ट की मौजूदा घटना के बाद मैं दिल्ली पुलिस को यह सलाह दूंगी की वह अपने रुख पर दृढ़ता से कायम रहे चाहे नतीजा कुछ भी हो.

 

वहीँ हम आपको बता दे की किरण बेदी भारत की पहली आईपीएस करने वाली महिला थी और पहली पुलिस वाली भी जिन्होंने प्रधानमंत्री की गाड़ी का चालान कटा था.