ALL Special Stories Delhi/NCR Current Affairs Political News Bollywood News T.V Serial Updates Breaking News Spiritual अजब गजब
अमेरिका के चक्कर में फंसा इंडिया 
April 7, 2020 • अर्पण न्यूज़ ब्यूरो • Current Affairs

जब पूरी दुनिया में covid19 को लेकर हाहाकार मचा है , और 200 से ज़्यादा देशों के वैज्ञानिक दिनरात एक कर रहे हैं , ताकि किसी तरह कोरोना वायरस का antidote उनके हाथ लग जाये इस संक्रमण को रोकने की दवाई उन्हें मिल जाये , ऐसे देशों में अमेरिका ,जर्मनी जापान जैसे कई बड़े और विकसित देश शामिल है, लेकिन आखिर क्या कारण है की अमेरिका को भारत से एक साधारण सी दवाई के लिए मदद मांगनी पड़ी ? 
अमेरिका ने भारत से दो दवाइयों को निर्यात करने के लिए कहा है , जिसमे पहली  है मलेरिया की दवा हाईड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन और एक अन्य महत्वपूर्ण दवा पैरासीटामॉल को भारत ने अमेरिका को निर्यात की मंजूरी दे दी है. गौरतलब है की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद पीएम नरेंद्र मोदी को फोन कर क्लोरोक्वीन के निर्यात को खोलने का अनुरोध किया था. 
अब ये भी जान लीजिये की ऐसी क्या वजह है जो अमेरिका इन दवाइयों के लिए भारत के सामने हाथ फैला रहा है ?
पहले बात करते हैं ,पैरासीटामॉल की PCM के नाम मशहूर ये दावा वो दवा है जिसे भारत का बच्चा बच्चा जनता है , सर्दी ज़ुकाम , बदन दर्द इन सब परेशानियों में अक्सर ये ही दवा दी जाती है , वहीँ कुछ बीमारियाँ जो जानलेवा हैं जैसे डेंगू , चिकनगुनिया और ऐसे मच्छर से फैलने वाले संकर्मण में ये राम बाण इलाज है , 
मलेरिया की दवा हाईड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन भी काफी कारगर साबित हुई है , भारतीय डॉक्टर्स इस बिमारी को इस लिए भी रोक पा रहे हैं क्योंकि इंडिया में इस तरह के संकर्मन हर साल होते हैं और बड़ी मात्र में होते हैं , अगर आप नज़र डालें तो अभी तक तक़रीबन 114 लोगों ने जान गवाई है 4000 चपेट में हैं और 325 लोगों को ठीक किया जा चूका है जिनमे एक 82 वर्षीय सेनिअर सित्य्ज़ं भी हैं .वहीँ अगर अमेरिका की बात करें तो अमेरिका में कोरोना वायरस के संक्रमण से 10 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है और वहां 3.6 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हैं, ऐसे में भारत का फ़र्ज़ बनता है की वो अमेरिका की मदद के लिए आगे आये , लेकिन चुनोती ये है की भारत की आबादी 135 करोड़ है और इतनी बड़ी मात्र में लोगों के होने की वजह से पहले पहले अपने लोगों के लिए हाईड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन और
पैरासीटामॉल पार्यप्त मात्र में बनाना मुश्किल हो रहा है , ऐसे में आपकी क्या राय है क्या भारत को इन दवाइयों को अमेरिका को देना चाहिए या नहीं देना चाहिए ??