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लड़की के साथ LOCKDOWN के बीच जो हुआ...वो आपको सोचने पर मजबूर कर देगा
April 11, 2020 • चीनू की कलम से .... • Special Stories

 

वो लड़की जो अक्सर रुठ जाया करती थी....

तिलमिलाती धूप, दोपहर का समय और हर रोज की तरह अपनी बेटी का इंतजार करती कृष्णा... वो बार बार उठती और खिड़की या दरवाजे से झांककर वापिस अंदर चली जाती थोड़ी बैचेन थी लेकिन उसकी ये बैचेनी अपनी जगह बिल्कुल जायज थी समय बीतता जा रहा थी लेकिन उसकी एक लौती बेटी ट्यूशन से घर नहीं लौटी थी.. कृष्णा की निगाहें बार बार घड़ी पर जाकर अटक जाती इंतजार था दरवाजे के खड़कने का किसी का आहट का... मगर ये क्या वक्त बीतता जा रहा था दोपहर श्याम में तब्दील होती जा रही थी और इसी के साथ कृष्णा की दिल भी बैठा जा रहा था कि आखिर उसकी फूल सी बच्ची गुंझन कहा रह गई.. परिवार के लोग आस पास ही रहते थे लेकिन उसने किसी को भी इस बात का एहसास ना होने दिया कि आज उसकी प्यारी परी घर नहीं लौटी है।

शाम बीतने के साथ ही उसके मन में तरह तरह के ख्याल आने लगे गुंझन तो मेरे बिना एक पल नहीं रह सकती छोटी छोटी बातों पर अक्सर रुठ जाया करती है उसकी मन पसंद कोई चीज ना दिलाओ तो मुंह फुलाया करती है भला आज वो कहां रह गई मेरे सिवा उसका है ही कौन पिता की बस यादें ही तो है पढ़ा लिखाकर कॉलेज में उसका दाखिला कराना है उसके लिए पैसे भी जोड़ रही हूं क्योंकि वो अक्सर ही मुझसे कहती है कि मां मैं खूब पढ़ूंगी फिर हम यहां किसी अच्छी जगह चले जाएंगे मैं बड़ी होकर अपने ही जैसे लोगों की मदद भी करुंगी इसी तरह की कई बातें कृष्णा के जहन में चल रही थी...  निगाहें बार बार दरवाजे पर ही जा कर टिक रही थी इंतजार था तो बस गुंझन के कदमों की आहट सुनने का फिर हारकर वो टी.वी चलाती है ये सोचते हुए कि शायद किसी सहेली के घर चली गई कल कर्फ्यू भी तो था... टी.वी पर वो देखती है कि 21 दिनों के देश बंद कर दिया है टी.वी पर खबरें देख देखकर उसका दिल घबरा रहा था...।

कृष्णा खबरें देखकर ये जरुर भांप गई कि स्थिति गंभीर है कुछ न कुछ बड़ा हुआ है क्या है ये कोरोना और गुंझन किसी मुसीबत में तो नहीं है गुंझन को याद करते करते थककर वो कब सो गई शायद उसे खुद भी पता ना चला होगा सुबह दरवाजे की खड़कने की आवाज के साथ उसकी आँखे खुलती है दौड़ कर दरवाजा खोलती है इस आस में कि शायद गुंजन आ गई है लेकिन ये क्या ये तो मोनु है... मोनु अंदर आते हुए कहता है चाची आप घर से बाहर मत निकलना कुछ जरुरी सामान लाना हो तो बता देना देश में महामारी फैली है सरकार ने कहा है कि 21 दिनों तक घर पर ही रहें..।

अभी तक भी कृष्णा ने किसी को ये ना बताया कि था कि गुंजन कल से घर पर नहीं है लेकिन देश बंदी के बारे में सुनने के बाद कृष्णा ने मोनू से पूछा क्या तुने गुंजन को कहीं देखा है... मोनू का जवाब आया कल ही तो... वो ट्यूश्न वाले दीदी भैया के साथ गाड़ी में बैठी थी.. कही जा रहे होंगे शायद... ये सुनकर कृष्णा के सांसे ही मानो थम गई थी... कहां होगी, कैसी होगी, क्या कर रही होगी. किसी बड़ी मुसीबत में नहीं फंस गई है... आज तक उसने ऐसा नहीं किया कि मुझे बिना बताए कहीं चली गई हो... मैंने उसे कहा था कि कल ही तो कर्फ्यू लगा था आज क्या जरुरत है क्लास जाने की घर में ही रह जा लेकिन वो सुनती कहां है किसी की जिद्दी जो ठहरी कैसे पता लगाउं कहां जाउ यही सोचती रही मोनू ने समझाते हुए कहा मोनू समझाते हुए कहता है परेशान मत होओ आप आ जाएगी... ये कहते हुए वो सामान लेने निकल जाता है लेकिन कृष्णा के दिलोदिमाग में यही उधेडबुन चल रही थी कि गुंजन अब बड़ी होती है जा रही मेरे लिए वो आज भी बच्ची है लेकिन दुनिया के बारे में वो अंजान है कही उसके साथ कुछ गलत ना हो जाए... दूसरी ओर उसे गुंजन पर काफी ज्यादा गुस्सा भी आ रहा था जो कि वाजिब था बड़ बड़ा रही थी कि आखिर कब सयानी होगी ये कम अक्ल लड़की... इतने में मोनू सामान लेकर वापिस आता है...।

 

कृष्णा मोनू को कहती है सुन बेटा तु मेरे साथ चल रिपोर्ट लिखावाने ये बड़े घर वाले भैया दीदी ना जाने उसे कहां लेकर गए हैं पर चाची आज का दिन तो बीत चुका है कल का इंतजार कर लो शायद आ जाए वर्ना कल सुबह चलना मेरे साथ ये कहते हुए मोनू चला जाता है लेकिन कृष्णा को रातभर नींद कहां आने वाली थी वो टी.वी चलाती है और देखती है देश में अफरा तफरी का माहौल है लोग ना जाने कहां कहां फंसे है परेशान है अपने घरो को जाने के लिए... ये देखकर उसकी चिंता भी बढ़ गई पुरी रात उसने जागकर ही काट दी सुबह फिर दरवाजे पर मोनू आता है चलो चलते हैं पुलिस स्टेशन... इतने में दरवाजे पर किसी के आने की आहट सुनाई देती है दरवाजा खड़कता है ये तो पड़ोस की रश्मि है जो कोलोनी में सबसे ज्यादा पढ़ी लिखी थी वो अंदर आती है और अपना फोन मोनू के हाथों में थमाते हुए कृष्णा से पूछती है कहां है गुंजन कृष्णा को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या जवाब दे क्योंकि वो रश्मि को अच्छी लड़की नहीं समझती है वो अक्सर फोन पर ही जो लगी रहती थी.. रश्मि फिर पूछती है कहां है गुंजन जरा मैं उसे शाबाशी तो दूं इतनी देर में मोनू फोन आगे बढाते हुए कृष्णा को वीडियो दिखाता है और कहता है ये देखो चाची अपनी गुंजन दीदी भैया के साथ मिलकर गरीबों को खाना बांट रही है कृष्णा के आंखों से झरने की तरह आंसू बहने लगते है... मुंह से कुछ नहीं बोल पाती...