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मोदी सरकार में क्यों इतने बार लगा राष्ट्रपति शासन.
November 29, 2019 • अर्पण न्यूज़ ब्यूरो

 

महाराष्ट्र में सरकार न बन पाने की वजह से महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागु हो गया है जिसके बाद से ही शिवसेना यह कहे रही है की महाराष्ट्र के राजयपाल भगत सिंह कोश्यारी ने ये फैसला बीजेपी के दबाव में लिया है मगर हम आज आपको इस रिपोर्ट में महाराष्ट्र की राजनीति या महाराष्ट्र में लगे राष्ट्रपति शासन के बारे में नहीं बताएंगे बल्कि आज हम आपको  ये बताएंगे की मोदी सरकार में अब तक कितने बार देश में राष्ट्रपति शासन लग चूका है और किन राज्यों में लगा है.

 

शुरुआत करते है महाराष्ट्र से, महाराष्ट्र में अभी तक मोदी सरकार में 2 बार राष्ट्रपति शासन लागु हो चूका है जिसमे पहली बार ये लागु हुआ था 28 सितंबर 2014 को.  2014 में चुनाव होने से ठीक पहले सत्ता में कांग्रेस की सरकार थी. कांग्रेस अपने सहयोगी दल एनसीपी सहित अन्य दलों के साथ अलग हो गई थी. उस समय महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण थे, उन्होंने विधानसभा भंग कर दी थी. जिस वजह से कांग्रेस-एनसीपी का 15 साल पुराना गठबंधन टूट गया था. और इस वजह से 28 सितंबर 2014 से लेकर 30 अक्तूबर 2014 तक यानी 32 दिनों तक राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू रहा. इसके बाद महाराष्ट्र में दूसरी बार 12 नवंबर 2019 में राष्ट्रपति शासन लागु हुआ है जब चुनाव के बाद कोई भी पार्टी सरकार बनाने का दावा नहीं कर पा रही है.

 

इसके इलावा उत्तराखंड में भी मोदी सरकार के आने के बाद साल 2016 में दो बार राष्ट्रपति शासन लगाया जा चूका है. पहला राष्ट्रपति शासन 25 दिन के लिए और बाद में 19 दिनों के लिए राष्ट्रपति शासन लगाया गया था. कांग्रेस में पहले फूट पड़ने के बाद राष्ट्रपति शासन लगा और दूसरी बार मई में विधायकों के दल बदलने की वजह से एक बार फिर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था.

 

इसके बाद अरुणाचल प्रदेश में साल 2016 में 26 दिनों के लिए राष्ट्रपति शासन लगाया गया था क्यूंकि कांग्रेस के 21 विधायकों ने 11 बीजेपी और दो निर्दलीय विधायकों के साथ हाथ मिला लिया था. जिस वजह से राज्य सरकार अल्पमत में आ गई थी और इसी वजह से राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था.

 

जम्मू-कश्मीर में जून 2018 में बीजेपी ने पीडीपी के नेतृत्व वाली सरकार से समर्थन वापस ले लिया था जिस वजह से महबूबा मुफ्ती ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद से राज्य में राष्ट्रपति शासन लागु हो गया था. राष्ट्रपति शासन के दौरान ही राज्य में आर्टिकल 370 को रद्द कर दिया गया और राज्य से विशेष राज्य का दर्जा भी वापस ले लिया गया है. हालांकि इससे पहले भी साल 2015 में विधानसभा चुनावों में सरकार बनाने के लिए राजनीतिक पार्टियां पर्याप्त उम्मीदवारों का गठन नहीं कर पायी थी जिसके चलते जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन राज्य में लागू किया गया था.

 

वहीँ सोचने वाली बात ये है की मोदी सरकार में 7 बार राष्ट्रपति शासन क्यों लगाया गया था